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कहीं 12 तो कहीं 14 साल में है सहमति से संबंध बनाने की इजाजत, भारत में क्यों उठ रही उम्र को कम करने की मांग?

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एफएनएन, नई दिल्ली:  देश में कानूनी तौर पर शारीरिक संबंध बनाने की उम्र 18 साल है, लेकिन इसको लेकर अभी काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, आपसी सहमति से संबंध बनाने की उम्र को 18 साल से घटाकर लोग 16 साल करना चाहते हैं। वहीं, विधि आयोग ने इस बात का विरोध किया है।

विधि आयोग ने सरकार को यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) अधिनियम के तहत सहमति से संबंध बनाने की मौजूदा उम्र के साथ छेड़छाड़ न करने की सलाह दी है। साथ ही, 16-18 आयु वर्ग के नाबालिगों की मौन स्वीकृति से जुड़े मामलों में सजा के मामले में निर्देशित न्यायिक विवेक शुरू करने का सुझाव दिया गया।

विधि आयोग ने कानून मंत्रालय को जो POCSO अधिनियम के तहत सहमति की उम्र पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है, उसमें सुझाव दिया है कि स्थिति को सुधारने के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता है।

जानें क्या कहता है पोक्सो एक्ट?

POCSO अधिनियम 2012 के तहत, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे की सहमति का शारीरिक संबंध में कोई महत्व नहीं होता है। ऐसे में यदि कोई भी व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाता है, तो उसे यौन उत्पीड़न का दोषी माना जाएगा। भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत, 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म माना जाता है, चाहे इसमें लड़की की सहमति शामिल क्यों न हो।

उम्र कम करने पर होगी परेशानी

पैनल का कहना है कि अगर आपसी सहमति से संबंध बनाने की उम्र को कम किया जाएगा, तो इससे आगे चलकर बाल विवाह और बाल तस्करी जैसे मामलों के खिलाफ लड़ाई लड़ने में परेशानी आ सकती है। कहीं न कहीं अगर मौजूदा उम्र में बदलाव किया जाता है, तो इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। पैनल ने अदालतों को भी सलाह दी है कि उन मामलों में सावधानी बरती जाए, जहां कम उम्र में प्रेम संबंध बन जाते हैं और इससे आपराधिक मामलों में वृद्धि हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को पुनर्विचार करने का आदेश

गौरतलब हो कि इन दिनों यह चर्चा का विषय इसलिए बना है, क्योंकि 16-18 आयु वर्ग के किशोरों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए संबंधों के आपराधिक मामलों में काफी तेजी आई है। ऐसे में किसी एक को दोषी करार देकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, इन सभी बातों के ध्यान में रखते सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सहमति की उम्र पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त को भारत में रोमियो-जूलियट कानून लागू करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सहमति से किशोर यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर केंद्र से जवाब मांगा।

क्या है रोमियो-जूलियट कानून?

2007 के बाद से कई देशों ने रोमियो-जूलियट कानून को अपनाया है। इसके तहत वैधानिक दुष्कर्म के आरोप किशोर यौन संबंध के मामलों में सिर्फ तभी लागू हो सकते हैं, जब लड़की नाबालिग हो और लड़का वयस्क हो। इसके तहत अगर किसी लड़के की आयु लड़की से चार साल से ज्यादा नहीं होगी, तो उसे दोषी नहीं माना जाएगा।

सरल शब्दों में कहें तो, यदि किसी लड़के की आयु नाबालिग लड़की से चार साल से अधिक नहीं है, तो वह आपसी सहमति से बनाए गए संबंधों में दोषी नहीं माना जाएगा।

बहुत से देशों में पहले ही अपनाया गया एक्ट

बहुत से देश रोमियो-जूलियट कानून के तहत नाबालिगों को यौन संबंध बनाने की इजाजत देती है। हर एक देश ने आपसी सहमति से संबंध बनाने की अलग-अलग आयु निर्धारित की है। मालूम हो कि इसे ‘एज एज ऑफ कंसेंट रिफॉर्म’ (Ease Age Of Consent Reform) कहा जाता है। आपको बता दें, इटली, जर्मनी, हंगरी और पुर्तगाल में संबंध बनाने की उम्र 14 साल है। श्रीलंका, यूके और वेल्स में आपसी सहमति से संबंध बनाने की उम्र 16 साल है।

जापान में पहले सहमति की उम्र 13 साल थी, लेकिन इसको लेकर माता-पिता काफी परेशान हुए और उनका मानना था कि ये उम्र काफी कम है, इसमें किसी को बहलाना-फुसलाना आसान है। ऐसे में काफी बहस और चर्चा के बाद कुछ समय पहले ही उम्र को 14 साल से बढ़ाकर 16 साल कर दी गई है।

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