पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के आवास पर दर्जा राज्यमंत्री सुरेश कोली की मौजूदगी में हुआ विवाद
मंडल अध्यक्ष गोल्डी गोरिया से कहासुनी के बाद हाथापाई का दावा, निकाय चुनाव में हार के बाद संगठन की अंदरूनी खींचतान पर उठे सवाल
एफएनएन, किच्छा : Kichha भारतीय जनता पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक चल रहा है या फिर अंदरखाने असंतोष की चिंगारी सुलग रही है? किच्छा में शनिवार को पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के आवास पर आयोजित भाजपा की बैठक के दौरान सामने आए विवाद ने पार्टी की स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा एससी मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजेश रज्जी और मंडल अध्यक्ष गोल्डी गौराया के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विवाद के दौरान राजेश रज्जी के साथ मारपीट की गई और उनके कपड़े तक फट गए। हालांकि, घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जानकारी के अनुसार, बैठक में दर्जा राज्यमंत्री एवं किच्छा के अध्यक्ष सुरेश कोली मौजूद थे। बैठक के दौरान किसी बात को लेकर राजेश रज्जी और मंडल अध्यक्ष गोल्डी गौराया के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ने और दोनों के बीच हाथापाई होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान राजेश रज्जी के साथ मारपीट की गई। बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की मौजूदगी में हुआ। बैठक में मौजूद अन्य पदाधिकारियों ने बीच-बचाव किया या विवाद के बाद क्या कदम उठाए गए, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
निकाय चुनाव में हार के बाद नया विवाद, संगठन पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। सात अक्टूबर को घोषित नतीजों में दोनों निकायों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। किच्छा में राजेश प्रताप सिंह और सिरौलीकलां में राशिदा बेगम अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। इन नतीजों के बाद क्षेत्र में भाजपा की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हुई थी।
ऐसे समय में पार्टी की बैठक के दौरान दो पदाधिकारियों के बीच कथित हाथापाई का मामला सामने आना संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। सवाल यह है कि जब पार्टी मिशन 2027 और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने की बात कर रही है, तब स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों के बीच तालमेल और अनुशासन बनाए रखने की चुनौती कितनी गंभीर है?
प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में विवाद, जवाबदेही पर निगाहें
बैठक में दर्जा राज्यमंत्री सुरेश कोली की मौजूदगी की बात सामने आने के बाद घटनाक्रम को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। यदि पार्टी की बैठक में पदाधिकारियों के बीच विवाद हाथापाई तक पहुंचा, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विवाद को रोकने और स्थिति को संभालने के लिए क्या कदम उठाए गए। हालांकि, इस संबंध में संबंधित नेताओं का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल पूरे मामले में राजेश रज्जी, गोल्डी गौराया, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और दर्जा राज्यमंत्री सुरेश कोली का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि विवाद की शुरुआत किस मुद्दे पर हुई, मारपीट के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं और पार्टी नेतृत्व इस मामले में कोई संगठनात्मक कार्रवाई करता है या नहीं।
किच्छा की राजनीति में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद पहले से ही हलचल है। अब भाजपा की बैठक में कथित हाथापाई का यह प्रकरण पार्टी के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा नेतृत्व इस विवाद को आपसी मतभेद मानकर सुलझाता है या मामले में जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की दिशा में कदम उठाता है।








