एफएनएन, कन्नौज: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समय पर वेतन और मानदेय देने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अधिकारियों को कर्मचारियों के मेहनताने में किसी तरह की देरी न करने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद कन्नौज जिले से सामने आया मामला इन निर्देशों के पालन पर सवाल खड़े कर रहा है।
विकास भवन स्थित उत्तर प्रदेश कौशल विकास विभाग में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी शशांक राजपूत की 30 सितंबर को मौत हो गई। शशांक दीनदयाल ग्रामीण कौशल्या योजना से जुड़े हुए थे और आउटसोर्सिंग के माध्यम से ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे।
महीनों से नहीं मिला था मानदेय
शशांक के परिजनों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला था। परिवार के मुताबिक आर्थिक तंगी और लगातार बढ़ते मानसिक तनाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। 28 सितंबर को उनकी हालत ज्यादा खराब हुई और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
शशांक की मौत के बाद उनके पिता अशोक कुमार राजपूत सदमे में हैं। उनका कहना है कि जब बेटा ही नहीं रहा तो अब पैसों का क्या करेंगे।
दिसंबर 2025 में हुई थी नियुक्ति
विभागीय अधिकारियों के अनुसार शशांक राजपूत की नियुक्ति दिसंबर 2025 में आउटसोर्सिंग के माध्यम से ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर के पद पर हुई थी। शुरुआती समय में उन्हें भुगतान मिला, लेकिन मार्च के बाद से विभाग के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका।
बताया जा रहा है कि शशांक ने बकाया मानदेय के भुगतान को लेकर अपनी मौत से पहले विभाग को कई पत्र भी लिखे थे। सहकर्मियों के मुताबिक, लगातार काम करने के बावजूद भुगतान नहीं होने से कर्मचारी परेशान थे।
विभाग और आउटसोर्सिंग एजेंसी की जवाबदेही पर सवाल
विभाग के डीपीएम शशिकांत मिश्रा ने भी माना कि चालू वित्तीय वर्ष में शशांक को मानदेय नहीं मिल सका था। वहीं, सूत्रों के हवाले से आउटसोर्सिंग एजेंसी पर नौकरी लगाने के एवज में पैसे लेने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले के बाद अब आउटसोर्सिंग कंपनी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का बकाया मानदेय कब मिलेगा और शशांक की मौत के मामले में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाएगी, इसे लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
शशांक राजपूत की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन और मानदेय के भुगतान की व्यवस्था आखिर इतनी लंबे समय तक कैसे लंबित रही।







