एफएनएन, देहरादून : उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समाज से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास की दिशा में नई पहल की तैयारी है। राज्य में पहली बार अल्पसंख्यक समाज के युवाओं का एक विशेष डेटाबेस तैयार किया जाएगा। उत्तराखंड अल्पसंख्यक हुनर परिषद की ओर से तैयार किए जाने वाले इस डेटाबेस में युवाओं की रोजगार संबंधी जरूरतों के साथ-साथ उन्हें किस क्षेत्र में प्रशिक्षण की आवश्यकता है, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।
इस डेटाबेस का मकसद सिर्फ युवाओं का आंकड़ा तैयार करना नहीं होगा, बल्कि इसके आधार पर भविष्य में रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कितने युवाओं को प्रशिक्षण की जरूरत है और उन्हें किन कौशलों से जोड़ा जा सकता है।
पहली बार तैयार होगा विशेष डेटाबेस
उत्तराखंड अल्पसंख्यक हुनर परिषद की ओर से डेटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें अल्पसंख्यक समाज के युवाओं की रोजगार और कौशल संबंधी जरूरतों से जुड़ी जानकारी जुटाने पर विशेष जोर रहेगा।
विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग पराग मधुकर धकाते के अनुसार, राज्य में अल्पसंख्यक समाज के युवाओं के लिए पहली बार इस तरह का विशेष डेटाबेस तैयार किया जाएगा। भविष्य में युवाओं के लिए योजनाएं बनाने और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने में यह डेटाबेस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
AI और ड्रोन जैसी तकनीकों से जोड़ने की तैयारी
मौजूदा समय में रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों में भी नए अवसर सामने आ रहे हैं। इसी को देखते हुए अल्पसंख्यक समाज के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर फोकस किया जा रहा है।
युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, ड्रोन तकनीक समेत अन्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसका उद्देश्य युवाओं को बदलती रोजगार जरूरतों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम बनाना और उनके लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
डेटाबेस तैयार होने के बाद युवाओं की रुचि और जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को ज्यादा लक्षित तरीके से संचालित किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत सामने आती है तो उसी के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकेंगे।
इससे प्रशिक्षण को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
पारंपरिक कौशल से आधुनिक तकनीक की ओर फोकस
उत्तराखंड अल्पसंख्यक हुनरमंद परिषद के उपाध्यक्ष शोएब अहमद ने बताया कि अब तक अल्पसंख्यक समाज से जुड़े युवाओं को कारपेंटर और वेल्डर जैसे कामों में प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। अब युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश की जाएगी, ताकि वे मौजूदा रोजगार जरूरतों के हिसाब से तकनीकी कार्यों से जुड़ सकें और इन कौशलों को स्वरोजगार के तौर पर भी अपना सकें।
रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं की होगी पहचान
इस पहल के तहत यह जानकारी जुटाई जाएगी कि अल्पसंख्यक समाज के कितने युवा रोजगार की तलाश में हैं, कितने युवाओं को अपने मौजूदा कौशल के बावजूद अतिरिक्त प्रशिक्षण की जरूरत है और कितने युवा नए तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण हासिल करना चाहते हैं।
इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए युवाओं के लिए प्रशिक्षण की दिशा भी तय की जा सकेगी।
तकनीकी प्रशिक्षण से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
परिषद की योजना के मुताबिक AI और ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्र आने वाले समय में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। ऐसे में युवाओं को इन क्षेत्रों में शुरुआती स्तर से लेकर उनकी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण देकर तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस पहल के जरिए अल्पसंख्यक समाज के युवाओं को पारंपरिक कौशल के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी क्षेत्र से जोड़ने और उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।








