एफएनएन, देहरादून : Uttarakhand में मदरसा बोर्ड को भंग हुए करीब दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के सैकड़ों मदरसे अब भी बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। राज्य में कुल 452 मदरसों में से 200 से अधिक ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने साफ किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
धामी सरकार ने बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2026 को मदरसा बोर्ड भंग कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। सरकार का जोर है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को विज्ञान, गणित और तकनीकी शिक्षा का बेहतर अवसर मिले, ताकि वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, पायलट और प्रशासनिक अधिकारी जैसे क्षेत्रों में अपना करियर बना सकें।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के मुताबिक, बिना मान्यता चल रहे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनमें मिड डे मील, स्कूल ड्रेस, मुफ्त किताबें और अन्य योजनाएं शामिल हैं। साथ ही, मान्यता नहीं होने के कारण इन संस्थानों से जारी प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राधिकरण ने अपने पहले सत्र में सात मदरसों समेत नौ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता दी है। वहीं, 2 सितंबर को करीब 26 अन्य मदरसों को मान्यता देने की तैयारी है। इसके अलावा लगभग 200 मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए इन्वेस्टमेंट पोर्टल पर आवेदन किया है।
प्रशासन ने बिना मान्यता संचालित मदरसों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी है। हाल ही में हरिद्वार जिले के मंगलौर में दो मदरसों को सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि मान्यता के लिए आवेदन नहीं करने वाले अन्य मदरसों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, राज्य में बिना मान्यता चल रहे 200 से अधिक मदरसों को नियमों के दायरे में लाना जरूरी है। प्रशासन और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ऐसे संस्थानों को बंद कराने की कार्रवाई करेंगे।








