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नक्शा नहीं, फिर भी धड़ल्ले से कट रही गायत्री ग्रीन कॉलोनी ! प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा कॉलोनाइजर

  • प्राधिकरण लाचार, कॉलोनाइजर दमदार !
  • काशीपुर हाईवे पर 11 एकड़ में अवैध प्लॉटिंग का खेल, नोटिस पर नोटिस लेकिन निर्माण कार्य जारी; सवाल—किसके संरक्षण में चल रहा है यह कारोबार ?

एफएनएन, रुद्रपुर : gayatri-green-colony जिला विकास प्राधिकरण और पुलिस के आदेशों को धता बताते हुए काशीपुर हाईवे पर एक कॉलोनी में निर्माण कार्य लगातार जारी है। हैरानी की बात यह है कि जिस कॉलोनी के पास स्वीकृत मानचित्र तक नहीं है, वहां करोड़ों रुपये की जमीन को प्लॉटों में तब्दील कर बेचा जा रहा है। प्राधिकरण ने दो-दो बार नोटिस जारी किए, पुलिस को निर्माण रुकवाने के निर्देश भी दिए, लेकिन मौके पर काम आज भी बदस्तूर जारी है।

सूत्रों के अनुसार काशीपुर रोड स्थित गायत्री ग्रीन कॉलोनी करीब 11 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है। जिला विकास प्राधिकरण की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कॉलोनी का स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं है और कई निर्माण कार्य नियमों के विपरीत किए जा रहे हैं। इसके बाद 29 जून को कॉलोनाइजर लाल सिंह के नाम नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब छह जुलाई को प्राधिकरण की टीम दोबारा मौके पर पहुंची। निर्माण कार्य रुकवाया गया और कोतवाली पुलिस को भी लिखित निर्देश दिए गए कि किसी भी हालत में आगे निर्माण न होने दिया जाए। इसके बावजूद मौके पर मजदूर, मशीनें और निर्माण सामग्री दिखाई देती रही। इससे प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्राधिकरण स्वयं निर्माण को अवैध मान रहा है, नोटिस जारी कर चुका है और पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दे चुका है, तो फिर निर्माण कार्य आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है? क्या संबंधित विभागों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?

प्रोजेक्ट प्रबंधन की ओर से दावा किया जा रहा है कि कॉलोनी सभी मानकों पर खरी उतरती है और आरएमसी की स्वीकृति उनके पास है। वहीं प्राधिकरण का कहना है कि स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत नहीं किया गया है और कमियों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।

अब यह मामला केवल एक कॉलोनी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल बन गया है। आखिर जब सरकारी आदेशों के बाद भी अवैध निर्माण नहीं रुकता, तो आम जनता यह मानने को मजबूर हो जाती है कि नियम सिर्फ कमजोर लोगों के लिए हैं, जबकि रसूखदारों के लिए कानून भी बौना साबित हो जाता है।

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