एफएनएन, देहरादून : Uttarakhand में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में SAARA (Spring and River Rejuvenation Authority) की उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और नदी पुनर्जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने SAARA को राज्य के लिए एक व्यापक ग्राउंड वाटर रिचार्ज पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संस्थानों, निजी भवनों और आवासीय सोसायटियों में वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए, ताकि भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके और जल संकट की समस्या से निपटा जा सके।
आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि प्रदेश के पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व वाले धारों और नौलों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन से जुड़े प्रस्ताव सभी जिलों से जल्द भेजे जाएं। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण राज्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
बैठक में प्रदेश की नदियों के पुनर्जीवन कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी पुनर्जीवन के लिए जल्द से जल्द एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जाए, ताकि सभी परियोजनाओं को एक समान प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने ‘एक जनपद-एक नदी’ अभियान के तहत प्राप्त प्रस्तावों पर तेजी से काम शुरू करने को कहा। साथ ही बड़े प्रोजेक्ट्स को विभिन्न विभागों के समन्वय (कन्वर्जेंस) के माध्यम से पूरा करने पर भी जोर दिया, जिससे योजनाओं का बेहतर और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में SAARA के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 86 परियोजनाओं पर कार्य जारी है। इनमें उत्तरकाशी, नैनीताल और टिहरी जिलों की 16 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी भी की जा चुकी हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव एल. फैन्नई, सचिव दिलीप जावलकर, रणवीर सिंह चौहान, सी. रविशंकर, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।






