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उत्तराखंड पेपर लीक मामला: CBI जांच के लिए केंद्र से मंजूरी का इंतजार

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एफएनएन, देहरादून: सितंबर 2025 का महीना उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए संघर्ष, उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बन गया. राज्य में पेपर लीक मामले ने ऐसा तूफान खड़ा किया कि सड़कों से लेकर सचिवालय तक युवाओं की आवाज गूंज उठी. इस आंदोलन ने न केवल सरकार को झकझोर कर रख दिया, बल्कि राज्य की भर्ती व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए. लगातार प्रदर्शन, धरने और विरोध के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खुद आगे आकर निर्णायक कदम उठाना पड़ा और पहली बार किसी पेपर लीक मामले में सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) जांच की संस्तुति सरकार को करनी पड़ी.

राज्य सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को सीबीआई जांच का प्रस्ताव भेज दिया गया है. अब केंद्र सरकार के निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है. राज्य सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि गृह मंत्रालय इस पर जल्द ही अंतिम निर्णय ले सकता है. इस बीच उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय को केंद्र से समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि प्रक्रिया में कोई देरी न हो.

एक ओर सीबीआई जांच की प्रक्रिया अपने औपचारिक रास्ते पर है तो वहीं राज्य पुलिस की एसआईटी की जांच भी तेजी से चल रही है. इसी सिलसिले में राजधानी देहरादून में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में एक जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में परीक्षार्थियों, आंदोलनकारियों, अभिभावकों और आम जनता ने खुलकर अपनी बात रखी.

किसी भी अपराधी को छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि आयोग ने अब तक दर्जनों लोगों के बयानों को दर्ज किया है. तकनीकी सबूतों की जांच का काम अंतिम चरण में है. जांच पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है. किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाएगा. चाहे वह किसी भी पद या किसी भी व्यक्ति से जुड़ा क्यों ना हो. कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.– न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी, सेवानिवृत्त –

जांच आयोग के सचिव विक्रम सिंह राणा ने भी इस पूरे मामले में स्पष्ट किया कि जांच पूर्ण पारदर्शिता के साथ की जा रही है. आयोग पर जनता का भरोसा सबसे बड़ा दायित्व है और इसीलिए हर कदम पर साक्ष्यों की गहराई से जांच की जा रही है.

राणा ने बताया कि जांच प्रक्रिया में कोई भी ढिलाई नहीं बरती जा रही है. सभी संदिग्धों से पूछताछ दस्तावेजों की जांच और परीक्षा केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है. आयोग जल्द ही अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसमें पूरे मामले की विस्तृत जानकारी होगी.

बेरोजगार संघ की मांग दोबारा हो निष्पक्ष परीक्षा: इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि जिन परीक्षाओं को निरस्त किया गया है, उन्हें जल्द से जल्द दोबारा आयोजित किया जाए. राम कंडवाल ने कहा कि बेरोजगार युवा महीनों से संघर्ष कर रहे हैं. सरकार ने अगर पारदर्शिता का भरोसा दिया है तो उसे अब निष्पक्ष परीक्षा आयोजित कर इस भरोसे को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा केवल औपचारिकता न होकर युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर होनी चाहिए. हम चाहते हैं कि जो भी परीक्षा दोबारा हो उसमें तकनीकी सुरक्षा और गोपनीयता सर्वोच्च स्तर पर सुनिश्चित की जाए.

आयोग ने दी परीक्षा तारीखों पर बड़ी जानकारी: उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अध्यक्ष गणेश मर्तोलिया ने होने वाली परीक्षाओं के संबंध में बड़ा अपडेट दिया. उन्होंने बताया कि 5 अक्टूबर और 12 अक्टूबर को जो परीक्षाएं रद्द हुई थीं, उनकी नई तारीखों की घोषणा 9 अक्टूबर को कर दी जाएगी.

गणेश मर्तोलिया से तय परीक्षाओं के रद्द होने पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि, क्योंकि इन तारीखों का ऐलान पहले ही हो चुका है लेकिन इस बीच हुए डेवलपमेंट के कारण परीक्षाओं को रोकना पड़ा. परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के मन में कोई शक न रहे इसलिए भी अब नए सिरे से परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी. बता दें कि, 5 अक्टूबर को समूह ग की सहकारी निरीक्षक वर्ग-2 और सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) परीक्षा आयोजित होनी थी. वहीं 12 अक्टूबर को भी परीक्षा की तारीख तय हुई थी.

उन्होंने कहा कि आयोग की प्राथमिकता युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है. हमारा प्रयास है कि नवंबर माह में इन परीक्षाओं का आयोजन कराया जाए, इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. सुरक्षा मानकों और परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की चूक न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है. सभी भर्ती परीक्षाओं में डिजिटल सुरक्षा तकनीक, QR कोड आधारित प्रश्न-पत्र ट्रैकिंग सिस्टम और CCTV मॉनिटरिंग जैसे उपाय लागू किए जाएंगे.

पेपर लीक का पूरा घटनाक्रम:

  • 21 सितंबर 2025 को यूकेएसएसएससी ने प्रदेशभर में असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर, पटवारी, लेखपाल, ग्राम विकास/ पंचायत अधिकारी समेत ग्रेजुएट लेवल के 416 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी.
  • परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही प्रश्न-पत्र के कुछ पन्ने सोशल मीडिया पर लीक हो गए. जिसके बाद प्रदेश में हंगामा हुआ.
  • पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज बहादुरपुर जट हरिद्वार से एग्जाम सेंटर से पेपर लीक हुआ था.
  • इसी सेंटर पर मुख्य आरोपी खालिद एग्जाम दे रहा था.
  • इस सेंटर के तीन कमरों कमरा नंबर 9, 17 और 18 शामिल जैंमर नहीं लगा था.
  • आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे बाद इंविजिलेटर से अनुमति लेकर खालिद बाहर निकला था
  • वॉशरूम में जाकर खालिद ने पेपर के कुछ शॉट क्लिक कर तीन पेज अपनी बहन साबिया को भेजे.
  • साबिया ने वो पेपर प्रोफेसर सुमन को भेजे और प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए.
  • सुमन ने इस मामले की जानकारी पुलिस को न देकर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार को दी.
  • बॉबी पंवार ने ये खबर वायरल की, जिसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया.
  • पुलिस ने मामले की जांच करते हुए प्रोफेसर सुमन से पूछताछ की.
  • उसके बाद पुलिस ने साबिया को गिरफ्तार किया.
  • साबिया ने अपने भाई खालिद के बारे में बताया.
  • मामला सामने आने के बाद खालिद फरार हो गया था. हालांकि बाद में पुलिस ने खालिद को भी गिरफ्तार कर लिया था.

फिलहाल खालिद और उसकी बहन साबिया जेल में बंद है. वहीं राज्य सरकार की तरफ से गठित की गई एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है. इसके अलावा राज्य सरकार की तरफ से केंद्र को सीबीआई जांच के लिए संस्तुति भेजी गई है.

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