Thursday, March 12, 2026
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तिहाड़ को मिलेगा नया महानिदेशक, हालात में सुधार लाना होगी बड़ी चुनौती, जेल से संगीन वारदात को अंजाम दे रहे गैंगस्टर

एफएनएन, नई दिल्ली :  देश की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल के नए महानिदेशक के लिए गृह मंत्रालय व एलजी वीके सक्सेना ने चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 30 अप्रैल को वर्तमान महानिदेशक संजय बेनीवाल सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अब तक यह देखा गया कि दिल्ली पुलिस में तैनात यूटी काडर के वरिष्ठ आइपीएस को ही तिहाड़ जेल का महानिदेशक बनाया जाता रहा है।

इस वर्ष के अंत तक 1988, 1989 व 1990 बैच के छह वरिष्ठ आइपीएस सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसलिए इन तीनों बैच के आइपीएस को महानिदेशक बनाए जाने की संभावना कम है। 1991 बैच के दो आइपीएस की सेवानिवृत्ति में एक साल से अधिक का समय है। ऐसे में इनमें ही एक को नया महानिदेशक बनाए जाने की चर्चा है।

तिहाड़ जेल के इतिहास को देखें तो किरण बेदी व विमला मेहरा के कार्यकाल को छोड़कर अन्य किसी के कार्यकाल में जेल में सुधार देखने को नहीं मिला। पिछले एक दशक से जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर जेल से ही मोबाइल के जरिये रंगदारी रैकेट व सुपारी किलिंग आदि संगीन आपराधिक वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
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सुकेश को दी जाने वाली सुविधाओं से छवि हुई खराब

गैंगवार में जेल के अंदर हत्या भी होने लगी हैं। कैदियों के पास आसानी से नशे का सामान, चाकू, ब्लेड व मोबाइल पहुंच जाता है। सुकेश चंद्रशेखर को दी जाने वाली सुविधाओं से जेल की छवि बहुत खराब हुई। 100 से अधिक जेल कर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। कहा जाता है कि वर्तमान में तिहाड़ के हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि वहां सुधार कर पाना मुश्किल हो गया है।

वर्तमान में 1988 बैच की सुंदरी नंदा हैं सबसे वरिष्ठ

यूटी काडर में वर्तमान में 1988 बैच की सुंदरी नंदा सबसे वरिष्ठ हैं। इनकी तैनाती फिलहाल एक मंत्रालय में है, लेकिन सेवानिवृत्ति इसी साल दिसंबर में है। कुछ साल पहले तक दिल्ली पुलिस में रहने के दौरान इनके द्वारा सुझाए दो बड़े फैसले का महकमे पर बुरा प्रभाव पड़ा।

पीसीआर यूनिट को जिला पुलिस के साथ मर्ज करने का फैसला इनका ही था। राकेश अस्थाना ने पीसीआर यूनिट को भंग कर जिले में मर्ज किया था। यह फैसला इतना गलत साबित हुआ कि गृहमंत्री के दखल के बाद पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा को पीसीआर को फिर अलग यूनिट बनाना पड़ा।

नंदा का दूसरा फैसला एसएचओ का कार्यकाल तीन साल करने का है। इससे फोर्स में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। एसएचओ बेहतर काम करने के बजाय भ्रष्टाचार में लिप्त होने लगे हैं। पुलिस विभाग को इस फैसले पर भी विचार करना होगा।

संभावना ये भी है…

मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आचार संहिता के कारण तिहाड़ के नए डीजी का चयन नहीं हो जाता है, तो विशेष आयुक्त (सुरक्षा यूनिट) दीपेंद्र पाठक को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है।

अन्यथा 1991 बैच के विवेक गोगिया या वीरेंद्र सिंह चहल में एक को नया डीजी बनाया जा सकता है। इसी बैच की नुजहत हसन का कार्यकाल जनवरी 2026 तक है, लेकिन उनकी संभावना कम है।

बैच नाम सेवानिवृति का समय
1988 सुदरी नंदा दिसंबर
1989 संजय बेनीवाल 30 अप्रैल
1989 एसके गौतम जुलाई
1990 दीपेंद्र पाठक जुलाई
1990 तेंजेंद्र लूथरा सितंबर
1991 आरपी उपाध्याय नवंबर
1991 विवेक गोगिया जुलाई 2025
1991 वीरेंद्र सिंह चहल सितंबर 2026
1991 नुजहत हसन जनवरी 2026

 

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