एफएनएन, रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंचकेदारों में शामिल Madhyamaheshwar Temple और Tungnath Temple के कपाट खुलने की तिथियों का ऐलान बैसाखी के पावन पर्व पर किया जाएगा। इसी दिन दोनों धामों की चल विग्रह उत्सव डोलियों के शीतकालीन गद्दीस्थलों से प्रस्थान का शुभ मुहूर्त भी निकाला जाएगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार हर वर्ष बैसाखी के दिन विद्वान आचार्य और तीर्थ पुरोहित पंचांग का गहन अध्ययन कर कपाट खोलने की तिथि तय करते हैं। इस खास मौके पर शीतकालीन गद्दीस्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

Madhyamaheshwar Temple को द्वितीय केदार के रूप में पूजा जाता है, जहां भगवान शिव के मध्य भाग की आराधना की जाती है। यही कारण है कि इसे मद्महेश्वर या मध्यमहेश्वर कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव को न्याय के देवता के रूप में भी पूजा जाता है और श्रद्धालु अपनी समस्याओं के समाधान के लिए यहां विशेष प्रार्थना करते हैं।
वहीं, Tungnath Temple पंचकेदारों में तृतीय केदार है, जहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है। समुद्र तल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर एक हजार साल से भी अधिक प्राचीन माना जाता है। तुंगनाथ से करीब एक किलोमीटर ऊपर स्थित चंद्रशिला शिखर से हिमालय की भव्य पर्वत श्रृंखलाओं का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।

मंदिर समितियों के अनुसार, बैसाखी के दिन पंचांग गणना के आधार पर कपाट खुलने की तिथियों की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इस दौरान आचार्य, हक-हकूकधारी और मंदिर समिति के सदस्य मौजूद रहेंगे। तिथि घोषणा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
अब श्रद्धालुओं की नजरें बैसाखी के दिन होने वाली इस घोषणा पर टिकी हैं, जिसके बाद चारधाम यात्रा के साथ पंचकेदार यात्रा की तैयारियां भी तेज हो जाएंगी।





