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जिस यूक्रेनी परिवार में उत्तराखंड के रुद्रपुर की प्रेरणा और तन्वी ने ली शरण, उस पर मिसाइल से हुआ अटैक

एफएनएन, रुद्रपुर : यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे भीषण युद्ध की आंच वहां के शहर सूमी तक आ पहुंची है। सूमी के एक यूक्रेनी परिवार के यहां शरण लेने वाली रुदपुर उत्‍तराखंड के रुद्रपुर निवासी प्रेरणा चौधरी और तन्वी चौधरी दहशत पैदा करने वाली जानकारी साझा की है। दोनों का कहना है कि यहां हर पल जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद चल रही है। प्रेरणा ने बताया कि जिस यूक्रेनी परिवार के घर में उन्होंने ने शरण ली है उसके पास ही मिसाइल से हमला हुआ है। मिसाइल हमले से बचने के लिए वह और तन्वी और एक और भारतीय छात्रा महिमा राठी बेसमेंट में छिप गए हैं। वहां हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं।

वाट्सएप काल से बातचीत करले हुए प्रेरणा चौधरी ने बताया कि यहां हालात बेहद खराब हो चुके हैं। हम लोगों ने एक यूक्रेनी परिवार के यहां शरण ली है। करीब 11 बजे जब हम सभी बैठे थे तभी एक मिसाइल का हमला घर पर हुआ। इस हमले में सभी बच गए हैं। तुरंत ही दहशत के बीच बेसमेंट में चले गए हैं। कुछ समझ नहीं आ रहा है। लगातार सायरन और मिसाइलों और बमों के धमाके सुनाई दे रहे हैं। प्रेरणा ने बताया कि कुछ देर बाद कि स्थितियों के बारे में वह बाद में जानकारी देंगीं। तब तक सभी लोग सुरक्षित रहना चाहते हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द यहां और रेस्क्यू करने की व्यवस्था करें, ताकि जिंदगियों को बचाया जा सके।

  • बेटियों के फोन बंद होने से उड़ी स्वजनों की नींद

यूक्रेन से रोमानिया बार्डर पहुंची तीन छात्राओं के फोन बंद होने से स्वजनों की नींद उड़ी है। बेटियों से सोमवार रात के बाद उनकी बात नहीं हो सकी है। दमुवाढूंगा निवासी मिताली मेहरा, मुखानी निवासी अंजलि श्रीवास्तव व बनभूलपुरा निवासी महक मलिक यूक्रेन से निकलकर रोमानिया बार्डर पर पहुंच चुकी हैं। मिताली और अंजलि दो दिन से इसी बार्डर पर फंसी हैं। सोमवार को महक भी रोमानिया पहुंच गई थी। मिताली के पिता देवेंद्र मेहरा ने बताया कि सोमवार की रात बेटी ने बताया था कि वह रोमानिया बार्डर से आगे बढ़ रही है। लेकिन रात अधिक होने पर उन्हें एक रेस्ट हाउस में ठहराया गया है। रात को बेटी ने फोन में बैटरी कम होनी की बात कहकर सुबह बात करने को बोला था। इसके बाद से बेटी का फोन बंद है। उन्होंने बताया कि बच्चे यूक्रेन से दशहत में निकले हैं। उनके अंदर डर बना हुआ है। तीनों बेटियों के स्वजनों नेे सरकार से मांग की है कि उनकी बेटियों को सकुशल स्वदेश लाया जाए।

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