एफएनएन , नई दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। सोनिया गांधी का कहना है कि मौजूदा सरकार के सत्ता से हटने के बाद भी देश की व्यवस्था को दोबारा मजबूत बनाने और पहले जैसी स्थिति में लाने में काफी समय लगेगा।
अपनी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव’ के विमोचन से पहले अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ को दिए साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, कांग्रेस की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब लोग देश को हुए नुकसान को महसूस करने लगे हैं और मौजूदा हालात को लेकर उनकी बेचैनी बढ़ रही है।
हालांकि, उन्होंने देश के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। सोनिया गांधी ने कहा, “मैं आशावादी हूं और मुझे विश्वास है कि भारत के लोग सुशासन की वापसी का स्वागत करेंगे।”
मोदी सरकार के बाद भी व्यवस्था सुधारने में लगेगा समय
सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतांत्रिक ढांचे, सामाजिक सौहार्द और संस्थाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, सरकार बदलने के बाद भी इन व्यवस्थाओं को पहले की तरह बेहतर और मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि इस काम में राजनीतिक दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी और सभी को मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करना पड़ेगा।
कांग्रेस को नहीं मिले समान अवसर, संस्थाओं पर सरकार का नियंत्रण होने का आरोप
कांग्रेस के कमजोर होते जनाधार और पार्टी के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर सोनिया गांधी ने निराशा जताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को समान अवसर नहीं मिले हैं।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का सभी संस्थाओं पर पूरा नियंत्रण है, विशेषकर निर्वाचन आयोग पर। उन्होंने मुख्यधारा के मीडिया पर भी सरकार के प्रभाव का दावा किया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के पास बहुत अधिक धनबल है और वह अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का इस्तेमाल करता है।
कांग्रेस कार्यकर्ता हर जिले और गांव में संघर्ष कर रहे हैं
सोनिया गांधी ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस संघर्ष कर रही है और आगे बढ़ रही है। उनके मुताबिक, पार्टी ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मजबूती से मुकाबला करने का साहस दिखाया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कई तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद पार्टी के कार्यकर्ता देश के हर गांव और जिले में संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चुनावों में धांधली के आरोप, विपक्षी दलों के साथ काम कर रही कांग्रेस
सोनिया गांधी ने हाल के महीनों में सामने आए चुनावी विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई चुनावों में धांधली हुई है और अब लोगों को भी इसकी जानकारी होने लगी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ मिलकर काम कर रही है। सोनिया गांधी के मुताबिक, पार्टी की राजनीतिक संभावनाएं दिन-ब-दिन बेहतर हो रही हैं।
मोदी के राजनीतिक उभार से कांग्रेस को क्या सीखना चाहिए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और उनके उभार से कांग्रेस को क्या सबक लेना चाहिए, इस सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री की वैचारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से अलग है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कांग्रेस में भी लोगों के राजनीति में सफल होने के कई रास्ते हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का उदाहरण दिया। सोनिया गांधी ने साफ कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कुछ सीखने की जरूरत है।
2004 में प्रधानमंत्री नहीं बनने का कोई अफसोस नहीं
साक्षात्कार के दौरान सोनिया गांधी से यह भी पूछा गया कि क्या कभी उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया होता तो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की नीतियां और कांग्रेस की रणनीति अलग होती।
इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा विचार कभी उनके मन में नहीं आया। सोनिया गांधी ने 2004 से 2014 तक के अनुभव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि उन्होंने और डॉ. मनमोहन सिंह ने एक टीम के रूप में काम किया था। दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं। मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि वह पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
10 नवंबर को प्रकाशित होगी सोनिया गांधी की 544 पन्नों की किताब
सोनिया गांधी की पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव’ को हार्पर कॉलिन्स इंडिया 10 नवंबर को प्रकाशित करेगा। 544 पन्नों की यह किताब एक निजी संस्मरण है, जिसमें राजनीति को मुख्य विषय के बजाय जीवन की कहानी की पृष्ठभूमि के रूप में रखा गया है।
इससे पहले सोनिया गांधी ने कहा था कि दशकों से दूसरे लोग उनकी कहानी बताते रहे हैं, लेकिन अब अपनी कहानी खुद बताने की बारी उनकी है। उन्होंने यह भी कहा था कि संस्मरण के प्रकाशन के समय कुछ ‘तमाशा’ होना तय है।
पेंगुइन से प्रकाशन को लेकर क्यों हुआ था विवाद?
सोनिया गांधी की इस किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर पहले अनिश्चितता बनी हुई थी। शुरुआत में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) इस पुस्तक को प्रकाशित करने की इच्छुक थी, लेकिन बाद में उसने स्पष्ट कर दिया कि वह भारत में इसकी प्रकाशक नहीं होगी।
यह विवाद पांडुलिपि में संपादकीय बदलावों को लेकर प्रकाशक और लेखिका के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद की खबरों के बाद सामने आया था। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस मामले में सरकारी दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया था।
कुछ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर पुस्तक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के कार्यकाल में चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कथित कब्जे से जुड़े अंश हटाने का दबाव बनाया गया।
हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उस पर किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं था। प्रकाशक के मुताबिक, वह पुस्तक प्रकाशित करने के लिए काफी उत्सुक था और इसे हासिल करने के लिए उसने प्रयास भी किए थे, लेकिन एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण पीछे हटने का फैसला किया।
प्रकाशक ने गोपनीयता संबंधी शर्तों और लेखिका के साथ हुए समझौते का हवाला देते हुए विवाद की वास्तविक वजह बताने से इनकार कर दिया था।
इटली में बचपन से लेकर राजीव गांधी से मुलाकात तक का सफर
सोनिया गांधी के संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग’ की शुरुआत इटली के वेनेटो क्षेत्र में उनके बचपन और युद्ध के बाद के दौर के अनुभवों से होती है। पुस्तक में उनके कैम्ब्रिज तक के सफर का भी जिक्र है, जहां वर्ष 1965 में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी।
संस्मरण में राजीव गांधी से उनकी शादी और अपनी सास तथा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात के बारे में भी बताया गया है। इसमें भारत आने के बाद यहां की संस्कृति और जीवनशैली को अपनाने के उनके अनुभव शामिल हैं। इसके तहत हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय खानपान को समझने जैसे पहलुओं का जिक्र किया गया है।
गांधी परिवार की त्रासदियों और 2004 की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र
इस पुस्तक में गांधी परिवार को झकझोर देने वाली कई बड़ी घटनाओं का उल्लेख है। इनमें संजय गांधी की विमान हादसे में मौत, वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और वर्ष 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं।
इसके अलावा संस्मरण में वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत से जुड़ी राजनीतिक घटनाओं को भी विस्तार से शामिल किया गया है। चुनाव में जीत के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय कांग्रेस तथा गठबंधन का नेतृत्व किया था। उनके नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने अगले 10 वर्षों तक केंद्र में सरकार चलाई।








