Tuesday, June 18, 2024
spot_img
spot_img
03
20x12krishanhospitalrudrapur
previous arrow
next arrow
Shadow
Homeराज्यउत्तराखंडअंकिता हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट...

अंकिता हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा महिला मंच, पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल

एफएनएन, देहरादून : उत्तराखंड महिला मंच अंकिता हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा। हाईकोर्ट इस मांग को खारिज कर चुका है। मंच की संयोजक निर्मला बिष्ट का आरोप है कि मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है।

महिला मंच की संयोजक निर्मला बिष्ट के मुताबिक मंच ने राष्ट्रीय स्तर पर महिला अधिकारों के लिए संघर्षरत संगठनों की महिलाओं के साथ मिलकर अंकिता हत्याकांड मामले की जांच की। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक आदि राज्यों की महिलाओं के जांच दल ने अलग-अलग समूहों में बंटकर 27 से 29 अक्टूबर तक प्रकरण की जांच की।

इस दौरान अंकिता के गांव डोब श्रीकोट (पौड़ी गढ़वाल) और ऋषिकेश में घटना स्थलों, अंकिता के माता-पिता व उसके गांव के लोगों, श्रीनगर में आंदोलन कर रहे जनसंगठनों, ऋषिकेश की कोयल घाटी में चल रहे धरना में शामिल लोगों से मुलाकात की गई। इसके अलावा घटना स्थल व आस-पास के होटलों, गंगा-भोगपुर के ग्रामीणों के साथ बातचीत की गई। इसके बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है।

  • अंकिता की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने में की थी आनाकानी

जांच में पता चला है कि पुलिस ने अंकिता की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी की। घटना के 72 घंटे के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। यह तथ्य भी सामने आया कि रिजाॅर्ट में मौजूद एक वीआईपी को विशेष सेवा देने से इन्कार करने पर रिजार्ट के मालिक ने अपने दो कर्मचारियों की मदद से हत्या को अंजाम दिया। मुख्य आरोपी पुलकित का पिता विनोद आर्य भाजपा सरकार में दर्जाधारी मंत्री रहा है। उसका सत्ता से सीधा संबंध रहा है, इसीलिए शुरूआत से ही इस मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही।

  • संगठन के तर्क

-एसआईटी दबाव में काम कर रही है, इसलिए सीबआई से जांच कराई जाए।

-पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने को मौत का कारण बताया गया है। उसके साथ बलात्कार हुआ या नहीं, किसी तरह की ज्यादती हुई या नहीं इस बात की जांच नहीं की गई।

– हत्याकांड में एक वीआईपी के शामिल होने की बात बार-बार सामने आ रही थी, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में जांच करने की जरूरत नहीं समझी।

– सभी कार्यस्थलों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशाखा गाइडलाइन लागू किए जाने के निर्देशों के बावजूद उत्तराखंड में पर्यटन क्षेत्र में इसे लागू नहीं किया गया है।

  • हजारों महिलाओं को इस तरह के हादसों से गुजरना पड़ता है

महिला मंच की ओर से दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा अंकिता की तरह देशभर में हजारों, लाखों महिलाओं को रोज इस तरह के हादसों से गुजरना पड़ता है। अंकिता भंडारी के लिए न्याय का संघर्ष महिला अधिकारों के सशक्तीकरण के लिए एक जरूरी कदम है। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर, एडवा नेत्री जगमति सांगवान, कविता कृष्णन, कविता श्रीवास्तव, मैमूना मुल्ला, उमा भट्ट, मल्लिका विर्दी आदि मौजूद रहीं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments