Monday, April 13, 2026
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कांग्रेस में अंदरूनी बयानबाजी फिर आई सामने, हरीश रावत ने “वाह, am I Tantrik” लिखकर साधा निशाना

एफएनएन, देहरादून : उत्तराखंड की राजनीति में “तांत्रिक” बयान को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। कुछ दिन पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की मौजूदगी में पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन के दौरान “नेता और तांत्रिक” का उदाहरण देते हुए एक टिप्पणी की थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया कि आखिर वह किस नेता की ओर इशारा कर रहे थे। कई लोग इसे कांग्रेस के ही किसी वरिष्ठ नेता से जोड़कर देखने लगे, हालांकि इस पर किसी का नाम सीधे तौर पर सामने नहीं आया।

इसी बीच अब इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अपने ऊपर उठ रहे सवालों और अटकलों का जवाब दिया है। पोस्ट की शुरुआत उन्होंने हल्के व्यंग्यात्मक अंदाज में “वाह, am I – #Tantrik…!!” लिखकर की, जिसने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया।

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह सोचना गलत है कि कांग्रेस उनके बिना नहीं चल सकती। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने 1968 के दौर का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह उस समय कांग्रेस को मजबूत करने के लिए उन्होंने और अन्य कार्यकर्ताओं ने मिलकर संघर्ष किया था। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे 1977 का कठिन दौर हो या 1990 के बाद उत्तराखंड की राजनीति का संकट, वह हमेशा पार्टी के झंडे के साथ मजबूती से खड़े रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि उन्होंने कभी पार्टी को छोड़ा नहीं और न ही मुश्किल परिस्थितियों में पीछे हटे। उन्होंने दावा किया कि हर कठिन समय में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर संगठन को जीवित रखने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी लिखा कि चुनावी हार और जीत उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं रही, बल्कि संगठन को मजबूत रखना उनकी प्राथमिकता रही है।

इस पूरे विवाद को और दिलचस्प बनाते हुए यह भी सामने आया है कि इससे पहले रामनगर के कांग्रेस नेता रणजीत रावत ने भी हरीश रावत पर “तंत्र-मंत्र” जैसे आरोप लगाए थे। उस समय यह मामला काफी चर्चा में रहा था, लेकिन बाद में शांत हो गया था। अब प्रकाश जोशी के बयान के बाद यह पुराना मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

कांग्रेस के भीतर इस समय चल रही बयानबाजी और अंदरूनी मतभेदों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। पार्टी के अंदर विभिन्न नेताओं के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार “तांत्रिक” शब्द को लेकर शुरू हुआ यह विवाद एक नई सियासी बहस को जन्म दे रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को किस तरह संभालता है और आगे क्या रुख अपनाया जाता है।

 

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