Wednesday, January 21, 2026
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Homeराज्यउत्तर प्रदेशखीरी में शारदा को अब न रोक सके, तो इतिहास बन जाएंगे...

खीरी में शारदा को अब न रोक सके, तो इतिहास बन जाएंगे तमाम गांव

  • यूपी में जिस इलाके में पहली बार पंजाबी आकर बसे थे, वो इलाका भी अब नदी में समाने वाला है। साल 1914 में शारदा नदी के दक्षिण करीब 10 किलोमीटर दूर बंजर को तोड़कर पंजाब से आए पंजाबियों ने हरे भरे खेत में बदल दिया था वह सारा इलाका अब नदी के बीच में है। पूर्व प्रधान प्रतिपाल सिंह बताते हैं कि उनके नाना 1914 में पंजाब से जब यहां आए थे तो पूरा इलाके में जंगल झाड़ी खड़ा था , उनके साथ में आए कुछ परिवार यहां बस गए और उसके बाद यहां कुछ सालों में लहलहाते खेत नजर आने लगे।

अब्दुल सलीम खान, लखीमपुर खीरी :  किसानों के लिए नदियां वरदान होती हैं, लेकिन खीरी जिले में शारदा नदी अभिशाप बन चुकी है । शारदा नदी इस इलाके में 80 के दशक से कटान कर रही है, इस बीच नदी ने हजारों  और दर्जनों गांव को लील लिया है । बीते 4 साल में शारदा बिजुआ के उत्तर दिशा में अकालगढ़ को काट चुकी है ।

  • पंजाबियत सिखाने वाला इलाका कगार पर
    अकालगढ़ वही गांव है, जिसमें सन 1914 में जब पहली बार पंजाब से सिख फार्मर यूपी आए थे तो सबसे पहले यहीं आकर बसे थे। इस के बाद पूरनपुर, पलिया इलाके में पंजाबी बसते चले गए, साथ ही उत्तराखंड की तरफ इनकी आबादी बसी। अकालगढ़ गांव तो कट चुका है लेकिन अभी एक घर पूर्व प्रधान प्रतिपाल सिंह का बचा है, जो कि सबसे पहले बना था। दरअसल साल
    2017 में अचानक शारदा नदी ने अकालगढ़ को महज कुछ दिनों में काट दिया था । उसके बाद भाजपा सरकार ने इस इलाके में विधायक अरविंद गिरी के हस्तक्षेप के बाद 25 करोड़ की लागत की दो परियोजना बनाकर रेवती पुरवा रमेश्वरापुर के उत्तर की दिशा में नदी के किनारे बंधे बना दिए थे। जिससे पिछले 2 साल से नदी ने कटान नहीं किया था लेकिन इस बार नदी का कटान फिर से होने लगा है।
  • परियोजना का कुछ हिस्सा कटा, लेकिन अफसर नही जागे

    लखीमपुर :  इस बार कटान साल 2018 में बनी परियोजना को भी काटना शुरू कर दिया है। साथ ही खेतों को भी नदी काटने लगी है। जिससे परियोजना पर भी खतरा मंडरा रहा है । अगर इस परियोजना में पीछे की तरफ से नदी ने कटान शुरू कर दिया तो 25 करोड़ की लागत से बना बंधा नदी में समा जाएगा। और साथ ही कई गांव भी नही रहेंगे। शनिवार को शारदा नदी नया दुबहा के मनजीत सिंह, चरण पाल सिंह सोढ़ी, सुखजीत सिंह अमरिक सिंह बिट्टू के खेतों को काटकर गिरा रही है। जिस गति से कटान चल रहा है अगर यह जारी रहा तो नदी मरहिया नाले में गिर जाएगी। जिससे कई दूसरे गांव में भी भी कटान के मुहाने पर हो जाएंगे।

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