Sunday, February 8, 2026
03
20x12krishanhospitalrudrapur
IMG-20260201-WA0004
previous arrow
next arrow
Shadow
HomeIndia Newsआवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला जल्द

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला जल्द

एफएनएन, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें उसके पिछले आदेश में संशोधन करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने उसके पहले के आदेश का पालन न करने पर राज्यों पर नाराजगी भी जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आवारा कुत्तों के मामले में पहले दिए गए आदेशों में बदलाव की मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजनिया की पीठ ने एमिकस क्यूरी गौरेव अग्रवाल की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। उन्होंने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी।

पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पेश वकील की भी दलीलें सुनीं। ये दलीलें सात नवंबर 2025 के उस आदेश के पालन को लेकर थीं, जिसमें प्राधिकरण को राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा जानवरों को हटाने और सड़कों के किनारे जाली लगाने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट ने एडब्ल्यूबीआई से क्या कहा?

  • शीर्ष कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) से कहा कि वह उन गैर-सरकारी संगठनों के आवेदनों पर कार्रवाई करे, जो पशु आश्रय स्थल या एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) केंद्र खोलने की अनुमति मांग रहे हैं।
  • पीठ ने एडब्ल्यूबीआई के वकील से कहा, या तो आप आवेदन स्वीकार करें या खारिज करें, लेकिन इसे जल्दी करें।
  • वकील ने बताया कि सात नवंबर के आदेश के बाद अलग-अलग संगठनों से ऐसे आवेदनों की संख्या काफी बढ़ गई है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि वे इस मामले में अपनी लिखित दलीलें जल्द से जल्द दाखिल करें।

निर्देशों का पालन न होने पर राज्यों पर जताई नाराजगी
इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने बुधवार को कई राज्यों की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी न करने, डॉग पाउंड न बनाने और शिक्षण व अन्य संस्थानों के परिसरों से कुत्तों को न हटाने पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा, ये सभी हवा में महल बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पहले दिए गए निर्देशों के पालन पर भी दलीलों को सुना और असंतोष जताया। बेंच ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि जैसे वे कहानियां सुन रहे हैं।

कोर्ट ने असम के आंकड़ों पर जताई हैरानी
कोर्ट ने असम से जुड़े आंकड़ों पर आश्चर्य जताया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राज्य में 2024 में कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए, जबकि वहां केवल एक डॉग सेंटर है। कोर्ट ने यह भी बताया कि जनवरी 2025 में ही 20,900 लोगों को कुत्तों ने काटा, जो कि बेहद चिंताजनक है।

न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि आंध्र प्रदेश में 39 एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं, जिनकी रोजाना 1,619 कुत्तों की नसबंदी करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि राज्य को मौजूदा सुविधाओं का ऑडिट करना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि उनका पूरा इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। साथ ही नए एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए एक समय-सीमा तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों की पहचान के लिए राज्य को संबंधित हितधारकों की मदद लेनी चाहिए।

13 जनवरी सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट सात नवंबर 2025 के अपने उस आदेश में बदलाव की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें अधिकारियों को सार्वजनिक क्षेत्रों और सड़कों से आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था। 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह कुत्तों के काटने की घटनाओं पर राज्यों से ‘भारी मुआवजा’ दिलाने और ऐसे मामलों में कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जिम्मेदार ठहराने पर विचार करेगा। कोर्ट ने पिछले पांच साल से आवारा जानवरों से जुड़े नियमों को लागू न किए जाने पर भी चिंता जताई थी।

शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और रेल स्टेशनों जैसे सार्वजनिक जगहों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में ‘चिंताजनक वृद्धि’ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सात नवंबर को निर्देश दिया था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत आवारा कुत्तों को तय आश्रय स्थलों में भेजा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उनकी पुरानी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा जानवरों को हटाने का भी निर्देश दिया था।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments