एफएनएन , मुंबई : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके को कोर्ट के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया है। हालांकि, उनके परिवार का आरोप है कि दिल्ली पुलिस से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समय पर रिहाई नहीं मिली। रविवार सुबह महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में उनकी दादी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। रिहाई के बाद अभिजीत ने कहा कि वह अपने घर जा रहे हैं।
मां ने सरकार पर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके की मां अनीता भगवान दिपके ने इस मामले को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने अभिजीत को उसकी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोककर “बहुत बड़ा काम” किया है।
परिवार पहले से ही दादी के निधन से दुखी था। ऐसे में अंतिम संस्कार के दौरान अभिजीत की गैर-मौजूदगी ने परिवार की भावनात्मक तकलीफ को और बढ़ा दिया। परिजनों को आखिरी समय तक उम्मीद थी कि अभिजीत अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंच जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
कोर्ट के आदेश के बाद अभिजीत दिपके रिहा
दरअसल, शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके के साथ CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया था। बाद में तीनों को एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया।
रविवार को तीनों को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। हालांकि, अभिजीत की रिहाई तब हुई, जब उनकी दादी का अंतिम संस्कार हो चुका था।
लंबी बीमारी के बाद हुआ दादी का निधन
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की दादी सावित्रीबाई शंकरराव दिपके (85) का शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। रविवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार से पहले परिवार के एक सदस्य ने पत्रकारों को बताया कि दादी के निधन के बाद अभिजीत की रिहाई के लिए दिल्ली पुलिस से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन उन्हें समय पर रिहा नहीं किया गया।
दिल्ली पुलिस के दावे पर परिवार ने जताई असहमति
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया था कि अभिजीत को उनकी दादी के निधन और अंतिम संस्कार के समय की जानकारी तुरंत दे दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, उन्हें अपने गृह नगर जाने के लिए हर संभव सहायता देने की पेशकश भी की गई थी।
हालांकि, अभिजीत के चाचा विलास दिपके ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने हाथ जोड़कर कम से कम 10 बार पुलिस से अभिजीत को रिहा करने की गुहार लगाई थी, ताकि वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें।
विलास दिपके के मुताबिक, परिवार अभिजीत के पहुंचने का इंतजार कर रहा था। उन्होंने कहा कि अभिजीत को आखिरकार रविवार को रिहा किया गया, लेकिन तब तक अंतिम संस्कार में शामिल होने का मौका निकल चुका था।
संभाजीनगर से हिंगोली पहुंचा परिवार
दिपके परिवार को शनिवार दोपहर करीब 12 बजे दादी के निधन की सूचना मिली। इसके बाद परिवार के सदस्य संभाजीनगर से हिंगोली के लिए रवाना हो गए। उस समय परिजनों को उम्मीद थी कि दिल्ली में पुलिस हिरासत में मौजूद अभिजीत को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अपने गांव जाने की अनुमति मिल जाएगी।
परिवार ने आरोप लगाया कि अभिजीत को समय पर रिहाई नहीं मिलने से उनकी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। विलास दिपके ने कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि अभिजीत कम से कम अपनी दादी की अस्थियां लेने के समय मौजूद रह सकेंगे।
CJP ने दोहराया प्रदर्शन का आह्वान
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने रविवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अपनी अपील दोहराई। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। खबर के मुताबिक, राजधानी में 30,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं।
CJP और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर राजधानी में राजनीतिक विरोध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गतिविधियां जारी हैं।







