एफएनएन, धमतरी : धमतरी कलेक्टोरेट परिसर में एक युवक ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की.जैसे ही युवक को सुरक्षाकर्मियों ने देखा वैसे ही हड़कंप मच गया. इसके बाद आसपास मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने युवक से माचिस और पेट्रोल का डिब्बा छीना.इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया. पुलिस के मुताबिक युवक जमीन संबंधी मामले को लेकर बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाते हुए परेशान हो चुका था. इस वजह से उसने ये कदम उठाया है.
सुनवाई नहीं होने से था नाराज : जिस युवक ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की उसका नाम देवेंद्र साहू है. युवक भखारा के रामपुर का रहने वाला है. देवेंद्र साहू जमीन संबंधी मामले को लेकर दफ्तरों के चक्कर लगा रहा था. लेकिन समस्या का निराकरण नहीं होने से हताश होकर वो अपने साथ पेट्रोल और केरोसिन लेकर कलेक्टोरेट पहुंचा था.
कोटवार और पटवारी ने मृत मां कुसुम बाई के नाम से भी जमीन विभाजन कर दिया है. फूलचंद का फौती नामांतरण करके पुनः उसी भूमि में हिस्सा फर्द-बंटवारा में अभिप्रमाणित किया गया है. फर्द बंटवारा में 40 वर्षों से लापता बताया गया है. ग्रामीण कोटवार और पटवारी ने सांठ-गांठ करके बिना जानकारी दिए उनकी माता की अनुपस्थिति में फर्द बंटवारा किया है. जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीण है. इसी दरम्यान बंटवारा कर दिया गया है –देवेंद्र कुमार साहू,शिकायतकर्ता
मामले का हो चुका है निराकरण : देवेंद्र कुमार ने बताया कि वह इसके लिए वो सरकारी दफ्तरों में गए. जिस पर किसी भी प्रकार की न्याय संगत कार्रवाई नहीं हुई. इसकी वजह से उसने ऐसा कदम उठाया है. इस संबंध में अपर कलेक्टर रीता यादव ने बताया कि तहसील,एसडीएम न्यायालय और आयुक्त रायपुर में मामला चल चुका है. मामले का निराकरण किया जा चुका है.
देवेंद्र कुमार साहू ने आरोप लगाया है कि जो उनकी जमीन है उसे कोटवार बिना जानकारी दिए बिना उनके पिता स्वर्गीय तिहारु राम और बड़े पिता फूलचंद पिता तुलाराम का फौत स्वयं उठाया है. बिना जानकारी दिए फौत के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया था. पटवारी और कोटवार दोनों ने मिलकर फावती को उठाया है. जिनके द्वारा बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के फूलचंद पिता तुलाराम को मृत घोषित करके नामांतरण का अवैध रूप से लाभ उठाते हुए खाता-विभाजन कर दिया गया.
क्या होता है फौती और फर्द नामांतरण : फौती नामांतरण एक प्रक्रिया है जिसके तहत किसी मृत व्यक्ति की संपत्ति पर उसके कानूनी उत्तराधिकारियों (जैसे पत्नी, बच्चे) के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए जाते हैं. इस प्रक्रिया के लिए आवेदक को मृत्यु प्रमाण पत्र, जमीन के दस्तावेज (खसरा, खतौनी), पहचान पत्र और रिश्तेदारी के प्रमाण जैसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ तहसीलदार या संबंधित सरकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है.
फर्द नामांतरण को दाखिला खारिज भी कहा जाता है, संपत्ति के स्वामित्व को स्थानीय अभिलेखों में बदलने की एक कानूनी प्रक्रिया है. इसमें पुरानी एंट्री को हटाकर मौजूदा मालिक के नाम को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है. इसके लिए आवेदन पत्र, पहचान प्रमाण, बिक्री अभिलेख, और अन्य आवश्यक दस्तावेज जैसे कि मृत्यु प्रमाण पत्र, रजिस्ट्री की कॉपी, और शपथ पत्र की आवश्यकता होती है.






