एफएनएन, देहरादून : उत्तराखंड के चार जिलों में 112 बच्चे कोरोना संक्रमित हुए हैं। इनमें नवजात शिशुओं के साथ ही दो साल के बच्चे भी शामिल हैं। हाल ही में उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से कोविड की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई थी। राज्य में कोरोना की तीसरी संभावित लहर के बच्चों के लिए अधिक खतरनाक होने की संभावनाओं के बीच जनपदों जिले में फैब्रिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने की तैयारी की जा रही है। सभी जिलों के जिलाधिकारियों से प्रस्ताव मांगे गये हैं, जिसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। प्रदेश की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा ने बताया कि सभी सीएमओ को आदेश दिए गए हैं कि बच्चे अगर कोविड की चपेट में आते हैं और उनको इलाज की जरूरत पड़ती है तो फैब्रिकेटेड अस्पताल के लिए तत्काल प्रस्ताव बनाकर भेजें। बताया गया है कि
इस संबंध में नैनीताल जनपद की सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी ने बताया कि 50 से 100 बेड के फैब्रिकेटेड अस्पताल का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। अस्पताल के लिए स्थान का चयन भी जल्द कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुमाऊं के मरीजों का सर्वाधिक भार सुशीला तिवारी अस्पताल पर है। यहां बच्चों के लिए 60 बेड का वार्ड पहले से हैं और 20 के करीब एसएनसीयू है। वहीं महिला अस्पताल हल्द्वानी में 12 बेड का पीआईसीयू है। इसके अलावा डीआरडीओ की ओर से पांच सौ बिस्तरों का का फैब्रिकेटेड अस्पताल भी हल्द्वानी में बन रहा है। इसमें 75 ऑक्सीजन और 50 आईसीयू बेड बच्चों के लिए होंगे। निजी अस्पतालों में केएचआरसी में आठ बेड का एनआईसीयू है, जबकि सेंट्रल हॉस्पिटल में पांच बेड का पीआईसीयू और पांच बेड का एनआईसीयू है। बच्चों के लिए दो वेंटीलेटर हैं। हालांकि, निजी अस्पताल के पीआईसीयू या एनआईसीयू अभी कोविड के लिए प्रयोग नहीं हो रहे हैं।






