एफएनएन, देहरादून : NEET UG काउंसलिंग के दौरान कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए MBBS और BDS में दाखिले के मामले में एसआईटी ने पहली दो गिरफ्तारियां की हैं। मामले की जांच के लिए गठित 10 सदस्यीय SIT टीम ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए हरिद्वार में भी दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की।
मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद देहरादून SSP और SIT अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्रवाई की जानकारी साझा की। पुलिस अब कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने, उनका सत्यापन कराने और इनके आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से दाखिले का आरोप
जांच के केंद्र में ऐसे प्रमाणपत्र हैं, जिनके जरिए कुछ अभ्यर्थियों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण श्रेणियों का लाभ लेने का आरोप है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम से कथित फर्जी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराकर राज्य कोटे की आरक्षित MBBS और BDS सीटों पर प्रवेश हासिल किया।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम और कथित जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता या आश्रित बताया। वहीं, संबंधित वास्तविक परिवार की ओर से ऐसे किसी लाभ का दावा नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है।
प्रमाणपत्रों में AI तस्वीरों के इस्तेमाल का भी दावा
इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि कथित फर्जी दस्तावेजों में AI से तैयार की गई तस्वीरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। SIT अब ऐसे दस्तावेजों की सत्यता, उनके निर्माण और सरकारी स्तर पर हुए सत्यापन की प्रक्रिया की जांच कर रही है।
350 से ज्यादा संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जानकारी
मामले में व्हिसलब्लोअर और पत्रकारों की ओर से स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रशासन को बड़ी संख्या में दस्तावेज सौंपे गए हैं। इनमें 350 से अधिक डोमिसाइल यानी निवास प्रमाणपत्रों के साथ-साथ SC, ST, OBC और EWS जैसी आरक्षित श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्र भी संदिग्ध बताए गए हैं।
इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों की जांच शुरू कराई। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संदिग्ध प्रमाणपत्र किन परिस्थितियों में जारी हुए और इनके आधार पर कितने अभ्यर्थियों ने आरक्षण का लाभ लेकर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया।
SP ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में SIT जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने SP ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। SIT देहरादून के साथ-साथ हरिद्वार और अन्य संबंधित कार्यालयों से रिकॉर्ड जुटाकर जांच कर रही है।
जांच में SDM और पटवारी कार्यालयों से जुड़े दस्तावेजों, प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और उनके सत्यापन से संबंधित रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
संदिग्ध प्रमाणपत्र निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू
मामले की जांच के साथ ही संदिग्ध प्रमाणपत्रों को निरस्त करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू की गई है। SIT अब गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के साथ पूरे नेटवर्क और प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित फर्जीवाड़े में कितने अभ्यर्थी और अन्य लोग शामिल थे और मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में इसका कितना असर पड़ा।







