एफएनएन, बरेली/देहरादून : उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का राजनीतिक भविष्य चर्चा के केंद्र में है, क्योंकि उनके पति और लंबे समय से उनके भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाने वाले गिरधारी लाल साहू (पप्पू) अब खुद चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। उन्होंने अपने पैतृक क्षेत्र बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के संकेत देकर सियासी हलचल तेज कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पप्पू बरेली की राजनीति में पूरी ताकत झोंक देते हैं, तो क्या सोमेश्वर में रेखा आर्या की पकड़ कमजोर पड़ सकती है? अब तक उनकी हर चुनावी जीत में पप्पू की रणनीति, संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ अहम भूमिका निभाती रही है। ऐसे में उनके सक्रिय रूप से अलग मोर्चे पर जाने से रेखा आर्या के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
इधर, कांग्रेस भी इस मौके को भुनाने की तैयारी में है और सोमेश्वर सीट पर एक मजबूत उम्मीदवार उतारने की चर्चा है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प और कड़ा होने के आसार हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम सिर्फ एक चुनावी फैसला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है—जहां एक ‘किंगमेकर’ खुद ‘किंग’ बनने की राह पर है। आने वाले समय में बरेली और सोमेश्वर की सियासत कई नए समीकरण गढ़ सकती है।





