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उत्तराखंड : कांग्रेस में शुरू हुई कुर्सी के लिए खींचतान, नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल धामी

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एफएनएन, देहरादून : विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद अभी नई सरकार का गठन भी नहीं हो पाया है, लेकिन कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए जोर आजमाइश शुरू हो गई है। अब धारचूला विधायक हरीश धामी ने युवा कार्ड खेलते हुए नेता प्रतिपक्ष के लिए खुद से अपना नाम आगे किया है।

कुमाऊं की धारचूला सीट से तीसरी बार के विधायक हरीश धामी का कहना है कि वह युवा विधायक हैं और लगातार अपने क्षेत्र से जीतते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा युवा नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान को भी पार्टी में युवाओं को मौका देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस में क्या विधायक मंत्रियों और बड़े नेताओं को समर्थन देने के लिए हैं। उन्हें भी नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी यदि उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपती है तो वह पार्टी की मजबूती के लिए रात-दिन कार्य करेंगे।

  • भितरखाने अभी से होने लगी है लॉबिंग, गढ़वाल और कुमाऊं का है फार्मूला

प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि दो प्रमुख कुर्सियों में से एक कुमाऊं मंडल के हिस्से में आ सकती है। होली के बाद विधानमंडल दल की बैठक होगी। संभव है कि इस मुद्दे पर भी उसी दिन चर्चा हो, लेकिन उससे पहले पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल यह दायित्व प्रीतम सिंह के पास है, जो गढ़वाल से आते हैं।

उत्तराखंड विधानसभा में अगला नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, इसको लेकर विधानमंडल दल की बैठक में चर्चा के बाद ही कुछ निकल पाएगा। पिछली बार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़कर नेता प्रतिपक्ष का दायित्व संभालने के लिए प्रीतम ने पहले तो इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उन्हें मना लिया गया था। इस बार भी प्रदेश अध्यक्ष पद और नेता प्रतिपक्ष पद के लिए पार्टी के भीतर ही गुटीय स्थिति देखने को मिल सकती है।

  • हरीश गुट की ओर से यशपाल आर्य का नाम किया जा सकता है आगे

दोनों में से एक पद कुुमाऊं के हिस्से में जा सकता है। जीती सीटों का समीकरण देखें तो कुमाऊं का पलड़ा भारी है। कुमाऊं से जहां पार्टी को 11 सीटें मिली हैं, वहीं हरिद्वार से पांच और देहरादून को मिलाकर गढ़वाल के हिस्से में मात्र तीन सीटें आई हैं। ऐसे में इन दोनों पदों पर गढ़वाल, कुमाऊं और मैदान के समीकरण के साथ ठाकुर-ब्राह्मण और दलित की स्थिति भी देखी जाएगी। प्रीतम से पहले डॉ.इंदिरा हृदयेश और हरक सिंह रावत नेता प्रतिपक्ष का दायित्व निभा चुके हैं।

चुनाव के बाद जिस तरह से पार्टी के भीतर गुटबाजी देखने को मिल रही है, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में नेता प्रतिपक्ष का चुनाव आसान नहीं रहने वाला है। प्रीतम सिंह को पार्टी पुन: रिपीट कर सकती है, लेकिन हरीश गुट शायद ही ऐसा होने दे। पार्टी सूत्रों की मानें तो हरीश गुट की ओर से यशपाल आर्य का नाम आगे किया जा सकता है। यशपाल कुमाऊं से होने के साथ ही जातीय समीकरण पर भी फिट बैठते हैं। वह सात बार के विधायक हैं और दो बार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।

 

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