Friday, April 3, 2026
03
20x12krishanhospitalrudrapur
previous arrow
next arrow
Shadow
Homeराज्यउत्तराखंडउत्तराखंड में बढ़ गई बाघों की संख्या, बिगड़ा संतुलन, अब नए प्रस्ताव...

उत्तराखंड में बढ़ गई बाघों की संख्या, बिगड़ा संतुलन, अब नए प्रस्ताव पर सरकार कर रही मंथन

एफएनएन, हल्द्वानी : पिछले ढाई माह में कुमाऊं में पांच लोगों की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि तीन घटनाएं पर्वतीय क्षेत्र भीमताल से जुड़ी है। जबकि गुलदार हर दिन किसी आबादी क्षेत्र में नजर आ रहे हैं।

बाघ और गुलदार की वजह से होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक बड़ी वजह बाघों के जंगल का ओवरलोड होना है। बाघों का जंगल इसलिए क्योंकि राज्य में इनकी कुल संख्या 560 है। इसमें से 476 बाघ नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और कार्बेट के जंगलों में गिने गए थे।

नए प्रस्ताव पर हो रहा है मंथन

जंगल की धारण क्षमता पर असर पड़ने की वजह से गुलदार संग कमजोर बाघों को भी मजबूरी में नई जगह का रुख करना पड़ रहा है। यही वजह है कि दिसंबर में बिनसर वन्यजीव अभयारण्य और वृद्ध जागेश्वर तक इसकी मौजूदगी देखने को मिली।

ऐसे में अब एक नए प्रस्ताव पर मंथन चल रहा है जो कि जंगल में संतुलन स्थापित कर बाघ और इंसान दोनों को बचा सकता है। इसके तहत दूसरे राज्यों से प्रस्ताव मिलने पर बाघों को शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल राजस्थान के प्रस्ताव पर गौर किया जा रहा है।

उत्तराखंड में ऐसी है बाघों की संख्या

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और बाघों की संख्या को देखे तो कुमाऊं के नैनीताल और ऊधम सिंह नगर के जंगल में 216 बाघ है। इन्हें वेस्टर्न सर्किल का जंगल कहा जाता है। जिसकी एक रेंज फतेहपुर में दिसंबर 2021 से जून 2022 के बीच सात लोगों की बाघ के हमले में मौत हुई थी।

बाघों को लेकर वन विभाग की सारी थ्योरी भी यहां धरी रह गई थी। क्योंकि, इस एक रेंज में आठ अलग-अलग बाघ घूम रहे थे। तब कयास लगाए जा रहे थे कि बाघों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं पिछले साल जुलाई में बाघ गणना के आंकड़े सार्वजनिक होने पर यह कयास सही साबित हुआ।

WhatsApp Image 2023-12-18 at 2.13.14 PM
IMG-20260328-WA0026
previous arrow
next arrow

शिफ्ट किए जाने पर किया जा रहा है विचार

उत्तराखंड में बाघों की संख्या 442 से बढ़कर 560 हो गई थी। इसके बाद नवंबर से दिसंबर के बीच खटीमा, टनकपुर, रामनगर और भीमताल में पांच लोगों की जान चली गई। इसके बाद बाघ अल्मोड़ा से आगे ठंडे जंगल तक पहुंच गया। ऐसे में वन विभाग के शीर्ष अधिकारी सीएम पुष्कर धामी के निर्देश पर अन्य राज्यों से प्रस्ताव आने पर शिफ्टिंग पर विचार की बात कह रहे हैं।

शिफ्टिंग से पहले इन बातों पर मंथन

बाघों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होगी। पहले यह देखना होगा कि संबंधित राज्य में उनके रहने के वासस्थल की स्थिति कैसी होगी। उस क्षेत्र में बाघों के सुरक्षित रहने की संभावना का आकलन होगा। उसके अनुकूल जैव विविधता व भोजन अहम मानक होगा। इसके बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय संग राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तक से अनुमति लेनी होगी।

उत्तराखंड के अलावा इन राज्यों में बाघों की मौजूदगी

मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, गोवा, अरुणाचल, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरला, असम आदि राज्यों में बाघ की मौजूदगी है। शीर्ष तीन में मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड आते हैं।

अधिकारियों ने कही ये बात

राजस्थान के प्रस्ताव का तकनीकी परीक्षण चल रहा है। देश के अन्य राज्यों से बाघों की शिफ्टिंग का प्रस्ताव आने पर भी विचार किया जा सकता है। इसके लिए भारत सरकार और एनटीसीए की अनुमति की जरूरत भी पड़ेगी।

यह भी पढ़ें: उत्तरकाशी में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 2.8 रही तीव्रता

उत्तरकाशी में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 2.8 रही तीव्रता

 

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments