विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता इतिहासकार श्री रणजीत पांचाले ने कहा कि आजादी के बाद यदि देश में नेताजी का शासन होता तो भारत को एक राष्ट्र न मानने वाले तथा भाषा, जाति या प्रांतीयता के नाम पर बांटने वाले तत्वों का आज अस्तित्व ही नहीं होता। नेताजी ने अगस्त 1942 में एक जर्मन पत्रिका में लेख में लिखा था कि स्वाधीन भारत में सभी तरह के विभाजनकारी तत्वों का सख्ती से सफाया कर दिया जाएगा।
अपने उद्बोधन में डॉ. पवन सक्सेना ने कहा कि समाज को राजनीति और बिजनेस में ज्यादा से ज्यादा प्रतिभागिता बढ़ानी चाहिए। इस काम में जितनी भी मदद हो सकती है की जाये, सभी अपने दिल दिमाग के दरवाजे अपने लोगों के लिए खुले रखें।