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खुल गई पोल : गल्फार ने न रॉयल्टी दी और न मिट्टी ली फिर कहाँ गई 40 लाख से ज्यादा की मिट्टी !

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  • गल्फार के इंजीनियर पर दबाव बनाकर लेटर जारी कराने वाला व्यक्ति कौन !
  • कौन मास्टरमाइंड है इस पूरे खेल के पीछे, प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में

एफएनएन, रुद्रपुर : अवैध खनन को लेकर किच्छा सुर्खियों में आ गया है। लालपुर में श्मशान घाट के पास सरकारी तालाब के नाम पर मिट्टी खनन अफसरों के गले की फांस बन गया है। बड़ा सवाल यह है कि जब नेशनल हाईवे का निर्माण कर रही गल्फार इंजीनियरिंग को मिट्टी की आवश्यकता थी ही नहीं तो फिर कैसे इस कंपनी के इंजीनियर के हस्ताक्षर से मिट्टी उठाने की अनुमति मिल गई। न तो कंपनी द्वारा मिट्टी उठाने के लिए रॉयल्टी दी गई और न ही एनएच पर मिट्टी डाली गई तो फिर 40 लाख से ज्यादा की मिट्टी आखिर कहां चली गई।

बड़ी बात यह है कि जिस इंजीनियर के हस्ताक्षर से अनुमति की बात कही जा रही है, वह इसके लिए अधिकृत ही नहीं है, तो आखिर किसने दबाव बनाकर उसके हस्ताक्षर कराए ? खैर, इस मामले में शासन के हस्तक्षेप के बाद खानापूर्ति करते हुए किच्छा प्रशासन ने भले ही जुर्माना लगा दिया हो लेकिन क्या जुर्माना मानक के अनुरूप है ? और फिर धरती का सीना चीरने वाले इन लोगों पर एफआईआर क्यों नहीं हुई यह भी बड़ा प्रश्न है।

किच्छा में सरकारी तालाब खोदने के नाम पर मिट्टी खनन में हुए बड़े घोटाले में ‘ जिम्मेदार ‘ अपने ही बुने जाल में फंस गए हैं। नेशनल हाईवे 74 का निर्माण कर रही गल्फार इंजीनियरिंग ने इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि जिस इंजीनियर ने कंपनी के लेटर हेड पर मिट्टी उठाने की अनुमति मांगी है वह इसके लिए अधिकृत है ही नहीं। इसके साथ ही कंपनी को मिट्टी की जरूरत है ही नहीं। इसलिए कंपनी ने न दो मिट्टी उठाने के लिए रॉयलिटी दी और न ही नेशनल हाईवे पर मिट्टी डाली गई। अब सवाल यह है कि आखिर कितनी बड़ी मात्रा में मिट्टी गई तो कहां। वही जब कंपनी का इंजीनियर इसके लिए अधिकृत था ही नहीं तो किसके दबाव में उसने लेटर जारी कर दिया।

कंपनी के अधिकारियों का यह भी कहना है कि नेशनल हाईवे पर मिट्टी डालने के लिए उनके पास अपने संसाधन हैं और इन्हीं संसाधनों का उपयोग करता है लेकिन यहां उसके संसाधन भी उपयोग में नहीं लाए गए। वहीं पूर्व मंत्री और किच्छा से विधायक तिलकराज बेहड़ का तो यहां तक कहना है कि मामले में पेंच फंसने के बाद गल्फार के इंजीनियर पर दबाव बनाकर सत्ता धारियों ने लेटर जारी कराया।

खैर, तिलकराज बेहड़ के मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखने के बाद अफसरों ने इस मामले में खानापूर्ति करते हुए नारायणपुर निवासी मोहित मिश्रा पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। मोहित इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड है। इनका आरोप है कि उसी के द्वारा कुछ सत्ताधारियों से मिलकर यह खेल खेला गया और 40 लाख से ज्यादा की मिट्टी बाजारी मूल्य पर बेंच की गई। सरकार के खाते में आई तो मात्र पौने दो लाख की रॉयलिटी।

अब कंपनी के इंजीनियर की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। वहीं अधिकारियों ने मामूली जुर्माना करते हुए इतिश्री कर ली है। मात्र 5000 मीटर पर जुर्माना लगाकर बड़े खेल को छुपाया जा रहा है। बेहड़ का आरोप है कि 15000 मीटर से ज्यादा खनन हुआ है। उन्होंने प्रदेश भर में खोदे जा रहे अन्य तालाबों की भी जांच की मांग की है। इसके साथ ही डीएम कार्यालय पर अगले सप्ताह अनिश्चितकालीन धरने की भी चेतावनी दे डाली है।

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