एफएनएन, देहरादून : Rekha Arya उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने सोमवार देर शाम मंत्री रेखा आर्या के बयान दर्ज किए। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री ने अपने बयान में कुछ ऐसे ठिकानों का भी जिक्र किया है, जहां से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य मिलने की संभावना है। अब जांच टीम इन जानकारियों का सत्यापन कर सकती है।
मामले में वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता, कंपनियों के दस्तावेज और दोनों पक्षों के आरोपों की जांच अहम मानी जा रही है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
SIT को दिए बयान में ठिकानों और दस्तावेजों का जिक्र
एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में गठित 10 सदस्यीय SIT ने सोमवार देर शाम रेखा आर्या के बयान दर्ज किए। इससे पहले उनकी तबीयत खराब होने के कारण बयान दर्ज नहीं हो सके थे।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने जांच टीम को गिरधारी लाल साहू से जुड़े कुछ ठिकानों की जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि इन स्थानों पर मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मिल सकते हैं। SIT इन जानकारियों की पुष्टि करते हुए आवश्यक साक्ष्य जुटा सकती है।
कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी विवेचना का अहम हिस्सा हो सकती है। मंत्री की ओर से आरोप लगाया गया है कि उनके हस्ताक्षरों का कथित रूप से दुरुपयोग कर उन्हें कंपनियों में निदेशक पद से हटाया गया। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का मिलान जांच में महत्वपूर्ण होगा।
15 अक्टूबर को दर्ज कराई थी प्राथमिकी
रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में मारपीट, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मंत्री की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया। अब SIT शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
गिरधारी लाल साहू ने ऑडियो को बताया फर्जी
मामले में वायरल ऑडियो को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। रेखा आर्या की ओर से साझा किए गए ऑडियो को मामले से जुड़े आरोपों के संदर्भ में सामने रखा गया है। दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर ऑडियो को फर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया हुआ बताया था।
गिरधारी लाल साहू ने रेखा आर्या पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे और मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब SIT वायरल ऑडियो की तकनीकी जांच कराने की तैयारी में है। फॉरेंसिक परीक्षण से रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें संभावित छेड़छाड़ से जुड़े पहलुओं की जांच में मदद मिल सकती है।
क्या दबाव बनाने की कोशिशों के बाद बदला मामला?
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर रेखा आर्या पर आरोप लगाए थे। वीडियो में उन्होंने कहा था कि उन्होंने रेखा आर्या को आगे बढ़ाने में मदद की और उनसे अपने खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने को कहा था।
उनके इस बयान के बाद मामले में संभावित समझौते को लेकर भी चर्चाएं हुईं। हालांकि, रेखा आर्या की ओर से SIT को बयान दिए जाने के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच समझौते या जांच की अंतिम दिशा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
फॉरेंसिक जांच से स्पष्ट होगी वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता
इस प्रकरण में वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। रिकॉर्डिंग में रेखा आर्या के खिलाफ कथित साजिश से जुड़ी बातचीत होने का दावा किया गया है। वहीं, गिरधारी लाल साहू इसे AI की मदद से तैयार किया गया फर्जी ऑडियो बता चुके हैं।
फॉरेंसिक विशेषज्ञ रिकॉर्डिंग की तकनीकी विशेषताओं का परीक्षण कर सकते हैं। इससे आवाज में संभावित बदलाव, रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ और कृत्रिम तरीके से ऑडियो तैयार किए जाने जैसे पहलुओं की जांच में सहायता मिलेगी। हालांकि, ऑडियो की वास्तविकता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
अब इन बिंदुओं पर टिकी है SIT की जांच
SIT के सामने अब वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच, कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन, हस्ताक्षरों का मिलान और शिकायत में बताए गए तथ्यों की पुष्टि जैसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। मंत्री के बयान में सामने आई जानकारियों के आधार पर संभावित साक्ष्यों की तलाश भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों और उनके जवाबों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।








