एफएनएन, देहरादून : Rekha Arya उत्तराखंड की राजनीति में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने उनकी घोषित संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, अधिवक्ता विकेश नेगी ने चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति और आय के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण करने की जरूरत बताई है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद सार्वजनिक हो चुका है। गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो में रेखा आर्य पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं।
रेखा आर्य की संपत्ति में पांच साल में कितनी बढ़ोतरी हुई?
चुनावी हलफनामों में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2022 के बीच रेखा आर्य की घोषित संपत्ति में करीब 12.42 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 12.78 करोड़ रुपये थी, जो 2022 के चुनावी हलफनामे में बढ़कर करीब 25.20 करोड़ रुपये बताई गई।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग चुनावों में उनकी घोषित संपत्ति इस प्रकार रही:
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2012 विधानसभा चुनाव: करीब 4.16 करोड़ रुपये
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2014 उपचुनाव: करीब 6.72 करोड़ रुपये
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2017 विधानसभा चुनाव: करीब 12.78 करोड़ रुपये
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2022 विधानसभा चुनाव: करीब 25.20 करोड़ रुपये
इन आंकड़ों के आधार पर 2017 से 2022 के बीच घोषित संपत्ति में लगभग 12.42 करोड़ रुपये की वृद्धि दिखाई देती है। हालांकि, केवल संपत्ति में बढ़ोतरी के आधार पर किसी तरह की अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए आय के स्रोतों और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
हरक सिंह रावत ने उठाए भ्रष्टाचार के मुद्दे, जांच की मांग
कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने रेखा आर्य की संपत्ति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति और उनकी आय के स्रोतों की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने इस मामले को प्रदेश में भ्रष्टाचार और राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ते हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं, राष्ट्रीय खेलों और सहकारिता विभाग में भर्ती जैसे विषयों पर भी सवाल उठाए।
हरक सिंह रावत का कहना है कि जांच किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा के पुराने और वर्तमान नेताओं की संपत्ति तथा आय के स्रोतों की भी जांच की मांग की।
उनके मुताबिक, यदि किसी जनप्रतिनिधि की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, तो यह देखना जरूरी है कि उसके पीछे घोषित आय, निवेश, संपत्ति की खरीद-बिक्री या अन्य वैध वित्तीय स्रोत क्या हैं।
रेखा आर्य और उनके पति के बीच विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने घरेलू हिंसा समेत कई गंभीर आरोप लगाए और अपनी तथा अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी आशंका जताई थी।
इसके बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर रेखा आर्य पर भ्रष्टाचार और करीब 210 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया। इन आरोपों के बाद उत्तराखंड की राजनीति में मामला गरमा गया।
कांग्रेस ने इस प्रकरण को लेकर रेखा आर्य के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, संपत्ति से जुड़े आरोपों की सत्यता जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्थापित हो सकती है।
रेखा आर्य के राजनीतिक सफर का भी हुआ जिक्र
हरक सिंह रावत ने रेखा आर्य के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए वर्ष 2012 और 2014 के चुनावों से जुड़ी घटनाओं का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, वर्ष 2012 में टिकट को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद रेखा आर्य निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरीं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2014 के उपचुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया और वह जीतकर विधानसभा पहुंचीं। हरक सिंह रावत ने कहा कि व्यक्तिगत संबंध अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगने की स्थिति में तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में ईडी, सीबीआई, एसआईटी या आयकर विभाग जैसी एजेंसियों से जांच कराने की मांग भी उठाई।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने बताया कैसे हो सकता है संपत्ति का आकलन
अधिवक्ता विकेश नेगी के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का आकलन करने के लिए अलग-अलग चुनावों के समय दाखिल किए गए हलफनामों की तुलना की जा सकती है।
इस प्रक्रिया में पहले चुनाव के दौरान घोषित चल और अचल संपत्ति की तुलना अगले चुनाव में दिए गए विवरण से की जाती है। इसके बाद संपत्ति में हुए बदलाव को संबंधित व्यक्ति की घोषित आय, वेतन, निवेश, संपत्ति की खरीद-बिक्री और अन्य वैध वित्तीय स्रोतों के साथ मिलाकर देखा जा सकता है।
विकेश नेगी ने जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले वेतन का भी संदर्भ दिया। उनका कहना है कि संपत्ति में बढ़ोतरी और घोषित आय के बीच संबंध समझने के लिए सभी संबंधित वित्तीय जानकारियों का तुलनात्मक अध्ययन जरूरी है।
हालांकि, केवल वेतन के आधार पर संपत्ति का आकलन करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि संपत्ति में बदलाव के पीछे विरासत, निवेश, ऋण, संयुक्त स्वामित्व और अन्य वैध स्रोत भी हो सकते हैं।
चुनावी हलफनामे के आंकड़ों में अंतर का दावा
रेखा आर्य के वर्ष 2022 के चुनावी हलफनामे के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, हलफनामे में कुल घोषित संपत्ति करीब 25.20 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि चल और अचल संपत्ति की अलग-अलग मदों को जोड़ने पर करीब 25.92 करोड़ रुपये का आंकड़ा सामने आने का दावा किया गया है।
बताए गए आंकड़ों के अनुसार:
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घोषित कुल संपत्ति: करीब 25.20 करोड़ रुपये
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मदवार गणना के आधार पर कुल संपत्ति: करीब 25.92 करोड़ रुपये
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दोनों आंकड़ों के बीच बताया गया अंतर: करीब 71.90 लाख रुपये
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घोषित संयुक्त अचल संपत्ति: करीब 17.01 करोड़ रुपये
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मदवार गणना के आधार पर अचल संपत्ति: करीब 18.01 करोड़ रुपये
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अचल संपत्ति के आंकड़ों में बताया गया अंतर: करीब 1 करोड़ रुपये
ये आंकड़े एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) से संबंधित विवरण के आधार पर बताए गए हैं। हालांकि, कुल संपत्ति और अलग-अलग मदों के जोड़ में अंतर के दावों की पुष्टि मूल चुनावी हलफनामे और संबंधित दस्तावेजों से किया जाना जरूरी है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंतर किसी गणना, वर्गीकरण या अन्य वजह से है।
रेखा आर्य का पक्ष मिलने पर होगा शामिल
इस मामले में रेखा आर्य की संपत्ति में बढ़ोतरी, आय के स्रोतों और हलफनामे के आंकड़ों में कथित अंतर को लेकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की जानकारी दी गई है। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब उपलब्ध नहीं था।
रेखा आर्य का आधिकारिक स्पष्टीकरण मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति की पारदर्शिता और आय के स्रोतों की जांच की मांग से जुड़ा है।








