एफएनएन, देहरादून : Mahila Aarakshan Uttarakhand को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। नारी वंदन अधिनियम संशोधन बिल संसद में पारित नहीं हो पाने के बाद देशभर में सियासी बहस तेज हो गई है, जिसका असर अब उत्तराखंड की राजनीति में भी साफ दिखाई दे रहा है।
इस बीच उत्तराखंड कांग्रेस ने राज्य विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर आज विधानसभा के बाहर धरना देने का निर्णय लिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है।
वहीं सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तब और बढ़ गया जब विशेष सत्रों को लेकर राजनीतिक रणनीति सामने आई। उत्तर प्रदेश में 30 अप्रैल और उत्तराखंड में 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाए जाने की तैयारी की जा रही है।
नारी वंदन अधिनियम और राजनीतिक विवाद
केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल को नारी वंदन अधिनियम संशोधन बिल पर विशेष सत्र बुलाया था, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह पारित नहीं हो सका। इसके बाद से ही सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
भाजपा का आरोप है कि विपक्ष ने जानबूझकर बिल का विरोध किया, जबकि विपक्ष इसे सरकार की रणनीति करार दे रहा है।
परिसीमन और सीटों का मुद्दा भी गरमाया
राजनीतिक बहस केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है। परिसीमन और लोकसभा सीटों में संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा तेज है। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 तक हो सकती है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।
कांग्रेस का धरना और भाजपा का पलटवार
कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। वहीं भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को “राजनीतिक नाटक” बताया है।
हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष ने बिना बिल पढ़े ही विरोध शुरू कर दिया, जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष से सहयोग की अपील की थी, लेकिन कांग्रेस ने समर्थन नहीं किया।






