एफएनएन , देहरादून : उत्तराखंड कांग्रेस में वरिष्ठ नेता हरीश रावत के सोशल मीडिया संदेश के बाद उनकी भूमिका और पार्टी में भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरीश रावत के बयान पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ नेता उनके योगदान को देखते हुए पार्टी में उनकी भूमिका स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस समय कांग्रेस को अंदरूनी मतभेदों से ऊपर उठकर चुनावी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
हरीश रावत के संदेश को लेकर पार्टी के भीतर जारी चर्चाओं के बीच हाईकमान से स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी उठ रही है। हालांकि, इस पूरे मामले पर नेताओं की राय अलग-अलग है।
हरीश रावत के संदेश पर कांग्रेस में चर्चा तेज
उत्तराखंड में राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। इसी बीच हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट और उनकी राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उनके संदेश को पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी भूमिका और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग के तौर पर देखा जा रहा है।
हरीश रावत के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि चुनाव के दौरान पार्टी में उनकी भूमिका क्या होगी और नेतृत्व उनके अनुभव का किस तरह इस्तेमाल करेगा। इसी मुद्दे पर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी राय रखी है।
हाईकमान हरीश रावत की भूमिका स्पष्ट करे: राजेंद्र शाह
कांग्रेस नेता राजेंद्र शाह का कहना है कि हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में उनके सोशल मीडिया संदेश के बाद पार्टी हाईकमान को उनकी भूमिका को लेकर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
राजेंद्र शाह के मुताबिक, नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में हरीश रावत की सेवाओं का किस तरह उपयोग किया जाएगा। इससे उनकी भूमिका को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सकती है।
पार्टी के भीतर की दुविधा खत्म हो: सुजाता पॉल
कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि इस समय पार्टी का ध्यान राहुल गांधी के निर्देशों के अनुसार वोट चोरी जैसे मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले पार्टी के भीतर इस तरह की चर्चाओं के बजाय नेतृत्व को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सुजाता पॉल के मुताबिक, हाईकमान को इस मामले में दुविधा खत्म करनी चाहिए, ताकि पार्टी का ध्यान अपने राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर बना रहे।
हरीश रावत को चुनाव में जिम्मेदारी देने की मांग
कांग्रेस नेता नीरज त्यागी ने भी हरीश रावत और पार्टी हाईकमान के बीच चल रही चर्चाओं को जल्द समाप्त करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि आगामी चुनाव में कांग्रेस एकजुट होकर काम कर सके।
पार्टी के कुछ नेताओं ने हरीश रावत के लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए चुनाव के दौरान उनकी भूमिका तय करने की बात कही है। वहीं, कुछ नेताओं का जोर इस बात पर है कि नेतृत्व को समय रहते स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
क्या है हरीश रावत का संदेश?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और नेतृत्व के प्रति आस्था का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता और नेतृत्व के प्रति विश्वास लोकतंत्र को मजबूती देता है।
अपने संदेश में हरीश रावत ने वर्ष 2002 और 2012 के राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने उन्हें केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी।
हरीश रावत ने अपने संदेश में लिखा कि जिस दिन उन्हें लगेगा कि वह पार्टी के लिए बोझ बन रहे हैं या पार्टी नेतृत्व उन्हें घर बैठने के लिए कहेगा, वह बिना किसी हिचकिचाहट के आदेश का पालन करेंगे।
उन्होंने अपने संदेश में कहा:
“लुढ़कते-लुढ़कते, घिसते-घिसते, शून्य में मिल सकता हूँ, लेकिन टूट नहीं सकता हूँ!”
हरीश रावत के इस बयान के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चुनाव से पहले नेतृत्व के फैसले पर नजर
हरीश रावत के संदेश पर कांग्रेस नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर चर्चा जारी है। कुछ नेता हाईकमान से स्पष्ट निर्णय चाहते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि चुनाव से पहले पार्टी को अपने मुद्दों और संगठनात्मक तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
अब इस मामले में कांग्रेस हाईकमान क्या रुख अपनाता है और हरीश रावत की भूमिका को लेकर कोई औपचारिक निर्णय सामने आता है या नहीं, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। फिलहाल, पार्टी नेताओं के बयान और हरीश रावत का संदेश उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।








