एफएनएन , देहरादून/गैरसैंण : उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने एक-दूसरे पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। वहीं, रेखा आर्य ने कांग्रेस के वर्ष 2012 से 2017 के शासनकाल का हवाला देते हुए विपक्ष पर पलटवार किया।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव को लेकर सवाल उठाए। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले आए इन बयानों से साफ हो गया कि सत्र के अंतिम दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहने वाला है।
प्रीतम सिंह ने रेखा आर्य से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की
कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि रेखा आर्य के पति की ओर से भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित आरोप लगाए गए थे और इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत की गई थी।
प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने करीब 210 करोड़ रुपये की संपत्ति और बरेली में कथित तौर पर बन रहे राजमहल का जिक्र करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब इस तरह के गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो सरकार को जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मामले को लेकर सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेगी।
रेखा आर्य ने कांग्रेस के शासनकाल पर उठाए सवाल
प्रीतम सिंह के आरोपों पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने से पहले वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को भी याद करना चाहिए।
रेखा आर्य ने उस दौर में सामने आए स्टिंग ऑपरेशन और कथित सौदेबाजी के मामलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार के खिलाफ कई विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी।
मंत्री ने विपक्ष पर बिना तथ्यों के जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस को उसके पुराने शासनकाल से जुड़े विवादों की याद दिलाते हुए कहा कि विपक्ष को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल पर भी विचार करना चाहिए।
यशपाल आर्य बोले- महत्वपूर्ण मुद्दों पर हो चर्चा
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष की रणनीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष नियम 310 के तहत काम रोको प्रस्ताव ला रहा है। इसके साथ ही नियम 58 के तहत भी सूचनाएं दी गई हैं।
यशपाल आर्य ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि विधानसभा की कार्यवाही व्यवस्थित तरीके से चले और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो। उन्होंने कहा कि सत्र का अंतिम दिन होने के कारण जरूरी मुद्दों को सदन में उठाने और उन पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा के नियमों के तहत विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका देने की मांग की, ताकि जनता से जुड़े सवालों पर सदन में चर्चा हो सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं और उसका उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता से बाहर होने पर पार्टी का रवैया देश और जनता के हितों के अनुकूल नहीं रहता। उन्होंने विपक्ष पर प्रदेश और देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया।
विधानसभा सत्र के अंतिम दिन भी आरोप-प्रत्यारोप तेज
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दूसरे दिन नेताओं के बयानों में कथित भ्रष्टाचार, पुराने शासनकाल के विवाद और सदन में चर्चा के अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। कांग्रेस ने मंत्री रेखा आर्य से जुड़े आरोपों की जांच की मांग उठाई, जबकि मंत्री ने कांग्रेस के पुराने कार्यकाल पर सवाल खड़े किए।
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने जनहित के मुद्दों पर चर्चा कराने की बात कही, जबकि मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव की मंशा पर सवाल उठाए।
इस तरह विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई। अब इन मुद्दों पर सदन में कितनी चर्चा होती है और सरकार तथा विपक्ष के बीच क्या रुख सामने आता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।








