एफएनएन, नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 की घोषणा और ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद अब पूरे देश की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक पर टिकी हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण बैठक आज, बुधवार से शुरू हो रही है, जिसके नतीजों का ऐलान शुक्रवार 6 फरवरी को किया जाएगा.
ब्याज दरों पर ‘ब्रेक’ की संभावना
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार एमपीसी नीतिगत दरों (Repo Rate) में और कटौती करने के बजाय ‘पॉज’ का बटन दबा सकती है. फरवरी 2025 से अब तक आरबीआई रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट (1.25%) की कटौती कर चुका है, जिससे यह वर्तमान में 5.25% पर है. विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल केंद्रीय बैंक का ध्यान सीधे तौर पर नकदी (Liquidity) प्रबंधन, बॉन्ड बाजार की स्थिरता और मुद्रा संबंधी जोखिमों को दूर करने पर होगा.
महंगाई और नए आंकड़े का इंतजार
ब्याज दरों को स्थिर रखने का एक बड़ा कारण महंगाई का बढ़ता जोखिम है. 12 फरवरी से प्रकाशित होने वाली नई बेस ईयर सीरीज में महंगाई के आंकड़े ऊपर जाने की आशंका है. यस बैंक (Yes Bank) की एक रिपोर्ट के अनुसार, “वर्तमान में रेपो रेट 5.25% है और महंगाई 4% के आसपास रहने का अनुमान है. ऐसे में 1.25% की रियल रेट तार्किक लगती है.” जानकारों का मानना है कि आरबीआई को अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखना चाहिए ताकि भविष्य में आर्थिक मंदी की स्थिति में उसके पास कार्रवाई करने की गुंजाइश बची रहे.
लिक्विडिटी और बॉन्ड मार्केट पर फोकस
DBS बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के मुताबिक, “वित्त वर्ष 2027 के बजट में भारी उधारी (Borrowings) का खाका खींचा गया है. ऐसे में केंद्रीय बैंक उधारी लागत को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रहेगा.” आरबीआई ने हाल ही में बैंकिंग सिस्टम में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की नकदी डालने के उपायों की घोषणा की है. इसके लिए ओपन मार्केट बॉन्ड खरीद (OMO), विदेशी मुद्रा स्वैप और वेरिएबल रेट रेपो (VRR) जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा.
बजट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के बाद बाजार में पहले से ही काफी हलचल है. ऐसे में आरबीआई का प्राथमिक उद्देश्य वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना होगा. यदि शुक्रवार को रेपो रेट में बदलाव नहीं होता है, तो यह बाजार के लिए एक संकेत होगा कि केंद्रीय बैंक अब तक की गई कटौतियों के असर का आकलन करने के लिए समय लेना चाहता है.






