एफएनएन, गुजरात : साबरकांठा जिले के प्रांतिज तालुका के सलाल इलाके में नकली दूध बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है. लोकल क्राइम ब्रांच ने कुल 71 लाख से अधिक के सामान के साथ पांच लोगों को हिरासत में लिया है और इस मामले में आगे की जांच कर रही है.
पिछले कुछ वर्षों से प्रांतिज के सलाल इलाके में रेलवे क्रॉसिंग के पास मौजूद श्री सत्या डेयरी प्रोडक्ट्स नाम की एक फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर जहरीला और केमिकल वाला दूध बनाने का काला धंधा चल रहा था और पता चला है कि यहां बनने वाले दूध में मिल्क पाउडर के साथ कॉस्मेटिक सोडा, पामोलिन ऑयल, डिटर्जेंट पाउडर और यूरिया खाद का इस्तेमाल किया जा रहा था.
गुप्त सूचना मिलने के बाद लोकल क्राइम ब्रांच ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों समेत एफएसएल की टीम के साथ श्री सत्या डेयरी प्रोडक्ट्स पर छापा मारा. इस दौरान कई संदिग्ध सामग्री मिली, जिससे पता चला कि दूध में कॉस्मेटिक सोडा और डिटर्जेंट पाउडर का भी इस्तेमाल किया जा रहा था. पुलिस ने फैक्ट्री से 71 लाख रुपये से अधिक का माल जब्त किया है.
पुलिस के मुताबिक, सत्या डेयरी प्रोडक्ट्स के नाम से दूध के पाउच बनाकर गांव के इलाकों में बेचा जा रहा था. इसके अलावा, यह दूध पाउच में दूर-दराज के गांवों में भी पहुंचाया जा रहा था.
फैक्ट्री का मालिक फरार
पुलिस को यह भी पता चला है कि ढुलाई में इस्तेमाल किए गए टेंपो की नंबर प्लेट भी गलत तरीके से लगाई गई थी. दूसरी ओर, छापेमारी के बाद मुख्य मालिक फरार हो गया है, जबकि फैक्ट्री में काम करने वाले एक नाबालिग समेत पांच आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच शुरू कर दी गई है.
गौरतलब है कि दूध को पूरी तरह से पौष्टिक माना जाता है, बच्चों से लेकर बड़ों तक करोड़ों लोग रोजाना दूध का इस्तेमाल करते हैं, जबकि चंद पैसों की लालच में आकर कुछ लोग केमिकल का इस्तेमाल करके नकली दूध बनाने और लोगो की जान को खतरे में डालने से भी नहीं हिचकिचाते.
साबरकांठा जिले में यह दूसरी घटना है. इससे पहले इडर तालुका के सिंगा गांव से भी नकली और केमिकल वाला दूध बनाने का मामला सामने आया था. हालांकि, यह भी पता चला है कि सलाल में पकड़ी गई यह दूध फैक्ट्री लोकल लेवल पर दूध की पैकिंग करके बेच रही थी.
फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी राकेश पटेल को गिरफ्तार करने की कोशिश में लगी है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में – जितेंद्रकुमार विट्ठलभाई पटेल (प्लांट ऑपरेटर), सचिनकुमार रमनजी मकवाना (कर्मचारी), करणकुमार कलाजी परमार (कर्मचारी), अजयसिंह रामसिंह परमार (कर्मचारी) और एक नाबालिग कर्मचारी शामिल हैं.






