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मैं जिंदा हूं’: SIR में गड़बड़ी पर बवाल, विधायक ने उठाए सवाल

एफएनएन, भानुप्रतापपुर : छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जारी है। इसी बीच कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फॉर्म-7 के जरिए एक जिंदा मतदाता को मृत घोषित कर उसका नाम मतदाता सूची से काटने का आवेदन किया गया। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित मतदाता शामिउल्ला अंसारी ने हैरानी जताते हुए कहा कि “मैं जिंदा हूं, फिर मेरे मृत होने का आवेदन कैसे दिया गया?” उन्होंने बताया कि उन्हें चौक पर लोगों से जानकारी मिली कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन किया गया है, जबकि वे रोज़ भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक पर मौजूद रहते हैं और वर्षों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं।

शामिउल्ला अंसारी ने कहा कि उन्होंने कभी किसी को ऐसा आवेदन देने के लिए नहीं कहा और न ही उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी है। उनका कहना है कि वे पूर्व में मतदान भी कर चुके हैं और सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।इधर आवेदन पत्र में दर्ज नाम के आधार पर जब वार्ड क्रमांक 2 निवासी फूल सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई आवेदन नहीं किया है और न ही वे इस मामले से किसी भी तरह जुड़े हैं।

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। क्षेत्र की विधायक सावित्री मंडावी ने कहा कि यह वही बात है, जिसकी आशंका पहले जताई जाती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार पूरे प्रदेश और देश में एफआईआर और मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मामलों को उठाते रहे हैं और अब इसका जीता-जागता सबूत सामने आ गया है।

विधायक ने बताया कि उनके सामने ही एक बुजुर्ग (शामिउल्ला अंसारी) मौजूद थे, जिनका नाम भी मतदाता सूची से काटने के लिए फॉर्म में शामिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भानुप्रतापपुर क्षेत्र में कई मुस्लिम भाइयों के नाम काटने के लिए फॉर्म बांटे गए हैं। इसके अलावा रामपुर पुरी के पास आदिवासी समुदाय के कम से कम 40 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी मिली है। विधायक ने सवाल उठाया कि किरण नरेटी नाम से फॉर्म देने वाला व्यक्ति कौन है।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों के पास आधार कार्ड, पुश्तैनी जमीन और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं और वे वर्षों से वहां खेती कर रहे हैं। विधायक सावित्री मंडावी ने एडीएम से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं इस मामले में कलेक्टर ने कहा कि विशेष रूप से फॉर्म-7 के तहत हमें जो आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनमें अलग-अलग तरीकों से नाम काटने का प्रयास किया गया है। इस मामले में दोनों पक्षों द्वारा शिकायत भी दर्ज की गई थी। उन्होंने बताया कि 2002 में जो एफआईआर हुई थी और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत अगर किसी का नाम था, तो उसमें कोई आपत्ति नहीं थी। उनका नाम हमारी प्रोविजनल लिस्ट में सम्मिलित किया गया है। यदि किसी कारणवश कोई व्यक्ति बाहर से आया है और उसका या उसके परिवार का नाम 2002 की सूची में है, तो उन्हें नोटिस देकर प्रक्रिया की जा रही है।

कलेक्टर ने आगे कहा कि नियमों के तहत बीएलओ या ब्लॉक लेवल एजेंट कुछ आवेदन दे सकते हैं, लेकिन निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन दिए जाने पर उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी। इस क्रम में प्रशासन पूरी कार्रवाई कर रहा है। हालांकि अधिकांश आवेदन जिनके नाम 2002 की सूची में हैं, उनमें कार्रवाई की संभावना कम है। फिर भी प्रशासन जांच कर रहा है कि किन्हीं शरारती तत्वों द्वारा आवेदन क्यों दिया गया। यदि इसमें किसी तरह से सरकार को बदनाम करने का प्रयास पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक गलती है या सुनियोजित साजिश? जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

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