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सिलक्यारा सुरंग पर आठ जनवरी तक आ सकता बड़ा फैसला, सड़क मंत्रालय ने बुलाई बैठक

एफएनएन, उत्तरकाशी :  चारधाम परियोजना की उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा सुरंग में सिलक्यारा की ओर से डी-वाटरिंग का कार्य 12 नवंबर से बंद पड़ा है। इससे सुरंग में पानी भरने की आशंका गहराने लगी है। हालांकि, इससे फिलहाल किसी तरह का कोई खतरा नहीं है।  सिलक्यारा की ओर से डी-वाटरिंग का कार्य तब ही शुरू हो पाएगा, जब सुरंग निर्माण को अनुमति मिलेगी।

सूत्रों के अनुसार, आठ जनवरी को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक में सुरंग निर्माण का कार्य शुरू करने को लेकर निर्णय हो सकता है। साथ ही सिलक्यारा की ओर से डी-वाटरिंग का कार्य किसी अन्य एजेंसी को दिया जा सकता है। इसके लिए एनडीआरएफ की भी मदद ली जा सकती है। इस संबंध में उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है।

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हादसे के बाद से बंद है डी-वाटरिंग

सिलक्यारा सुरंग में पिछले वर्ष 12 नवंबर को भूस्खलन हुआ और 41 श्रमिक 17 दिन तक अंदर ही फंसे रहे। 12 नवंबर को ही इन श्रमिकों ने सुरंग के अंदर मोटर चलाकर डी-वाटरिंग की थी। इसके बाद से सिलक्यारा की ओर से डी-वाटरिंग का कार्य बंद पड़ा है।

रोजाना 1000 लीटर की होती थी डी-वाटरिंग

सिलक्यारा की ओर से सुरंग की 2300 मीटर खोदाई हुई है और अंदर 2300 मीटर का प्वाइंट सुरंग के मुहाने की तुलना में 60 मीटर से अधिक डाउन पर है। डी-वाटरिंग का कार्य करने वाली निर्माण कंपनी के फीटर ने बताया कि सुरंग के अंदर सौ से अधिक स्थानों पर पानी का रिसाव है। यह पानी सुरंग में एकत्र होता है।

पहले प्रतिदिन करीब एक हजार लीटर से अधिक पानी की डी-वाटरिंग की जाती थी, लेकिन भूस्खलन की घटना के बाद से डी-वाटरिंग का कार्य बंद पड़ा है।

1700 से 2300 मीटर जलभराव का अनुमान

अनुमान है कि सुरंग के अंदर चेनेज 1700 मीटर से लेकर 2300 मीटर के बीच जलभराव हो गया होगा। इससे सुरंग के अंदर मशीनें, मोटर और वाहन खराब हो सकते हैं। वह कहते हैं कि फिलहाल सुरंग को खतरा तो नहीं है, लेकिन जब सुरंग निर्माण कार्य शुरू होगा, तब एक महीने से अधिक समय तो डी-वाटरिंग करने में लगेगा। इसके बाद ही सुरंग की खोदाई का कार्य शुरू हो पाएगा।

ट्रीटमेंट के बाद ही जा सकेगी सामान्य टीम

बताया कि डी-वाटरिंग करने वाली सभी मोटर भूस्खलन वाले हिस्से के दूसरी ओर हैं, जहां जाना अभी खतरे से खाली नहीं है। यहां सिर्फ एनडीआरएफ की टीम जा सकती है। सामान्य टीम तो तभी जा सकेगी, जब भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट हो जाएगा। इसके बाद ही वह डी-वाटरिंग का कार्य करने के लिए पाइपलाइन की मरम्मत और मोटर का संचालन कर सकते हैं।

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