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उत्तराखंड : भूमि पर मालिकाना हक का मामला लटका, 10 जिलाधिकारियों ने नहीं दी रिपोर्ट

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एफएनएन, देहरादून : प्रदेश में वर्ग तीन और वर्ग चार की भूमि पर काबिज हजारों परिवारों को मालिकाना हक का मामला फिलहाल लटका हुआ है। मंत्रिमंडल की उप समिति ने सभी जिलाधिकारियों से दोनों श्रेणियों की भूमि पर काबिज परिवारों के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन 10 जिलाधिकारियों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी।

मंत्रिमंडलीय उपसमिति दो बार इस संबंध में बैठक कर चुकी है और बृहस्पतिवार को उप समिति के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई तीसरी बैठक में सिर्फ तीन जिलाधिकारियों की रिपोर्ट प्राप्त होने की सूचना दी गई। इस पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने नाराजगी जाहिर की है। साथ ही सभी जिलाधिकारियों को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।

सरकार की ओर से प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। जिस पर काफी समय से लोग काबिज हैं। यह भूमि वर्ग तीन क की भूमि है, जबकि ऐसी सरकारी जमीन जिसे खाता खतौनी में लोगों को काबिज दिखाया गया है, वर्ग चार की भूमि है। इसके अलावा भी बड़ी संख्या में लोग सरकारी और अन्य भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हैं।
प्रदेश में इस तरह की भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक के लिए सरकार की ओर से मंत्रिमंडल की उप समिति गठित की गई है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, प्रदेश में वर्ग विभिन्न श्रेणी की जमीनों पर पूर्व में सरकारों ने नियमितीकरण का निर्णय लिया था, जिसकी समयावधि पूर्ण हो चुकी है, जिसे बढ़ाने को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई।

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अधिकारियों को इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसे कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्री ने कहा, सभी प्रकार की श्रेणी पर काबिज लोगों की जानकारी जब समिति को पेश की जाएगी, तभी इस संबंध में आगे कोई निर्णय समिति ले पाएगी। सरकार का उद्देश्य यह है कि कई श्रेणी की जमीनों पर वर्षों से काबिज लोगों को कैसे नियमानुसार जमीन पर अधिकार दिया जा सके, जिससे उनको जीवन यापन करने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

मंत्री ने यह भी कहा, जनवरी में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों के साथ इस संबंध में बैठक होगी। बैठक में मंत्री रेखा आर्य, प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय नितिन शर्मा, सचिव राजस्व सचिन कुर्वे आदि मौजूद रहे। त्यूनी परगना में वर्ग चार की जमीन के मालिकाना हक के लिए पूर्व में एक्ट में संशोधन किया गया था। जमीन के नियमितीकरण को लेकर समय सीमा 11 फरवरी 2022 को खत्म हो चुकी है। इसके विस्तारीकरण को लेकर मंत्रिमंडल की उप समिति सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजेगी।

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