केदारनाथ धाम में आमरण अनशन पर तीर्थ पुरोहित, यात्रियों को करना पड़ा दिक्क्तों का सामना

एफएनएन, देहरादून :  केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। धाम में तीर्थपुरोहितों ने भू-स्वामित्व का अधिकार देने समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जो आज सोमवार (18 सितंबर) से आमरण अनशन में बदल जाएगा।

दरअसल, केदारनाथ आपदा से प्रभावित तीर्थ पुरोहितों को भूमिधर अधिकार के तहत भवन देने समेत कई मांगों को लेकर केदारनाथ धाम में दुकानें, होटल और लॉज तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों के आंदोलन के चलते 16 सितंबर को पूर्ण रूप से बंद रहे। इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर एक दिवसीय धरना भी दिया। जिससे धाम पहुंचने वाले यात्रियों को खाने, पीने एवं रहने की खासी दिक्कतें उठानी पड़ी। वहीं मांगों पर उचित कार्यवाही न होने के चलते तीर्थपुरोहितों का यह धरना आज से आमरण अनशन में बदल जाएगा। बता दें, धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि, वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ धाम में जो भवन बहे थे और उनके स्थान पर निर्माण हुए भवनों को उन्हें सौंपा जाए। तीर्थ पुरोहितों को केदारनाथ में भूमि का अधिकार मिले। आपदा से पहले उन्हें भूमि का अधिकार था, लेकिन आपदा के बाद से अभी तक उन्हें भूमि का अधिकार नहीं मिल पाया है।

वरिष्ठ तीर्थपुरोहित व केदारसभा के सदस्य उमेश पोस्ती ने कहा कि आपदा में अपने भवन, भूमि खो चुके लोगों को भूस्वामित्व देने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार उनकी कोई सुध नहीं ले रही है। केदारनाथ में 24 घंटे तक व्यापारिक गतिविधियां बंद रखने के बाद भी सरकार की ओर से अपना पक्ष नहीं रखा गया है। उन्होंने पुनर्निर्माण के तहत केदारनाथ में बनाए जा रहे तीन से चार मंजिला भवनों को लेकर भी नाराजगी जताई। कहा, सरकार केदारनाथ को जोशीमठ बनाने का काम कर रही है।

केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि, जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती आंदोलन जारी रहेगा। धरना देने वालों में अंकित सेमवाल, कुंवर शुक्ला, संतोष त्रिवेदी, जगदीश तिनसोला, प्रदीप शर्मा, रमाकांत शर्मा, पंकज शुक्ला, बृजेश पोस्ती, विमल शुक्ला, देवेंद्र शुक्ला, लक्ष्मण तिवारी, प्रवीण तिवारी आदि थे। चारधाम तीर्थ महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि केदार सभा के बैनर तले चार सूत्री मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो चारों धामों में आंदोलन किया जाएगा।

 

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