03
Gemini_Generated_Image_yb399pyb399pyb39
previous arrow
next arrow
Shadow

उत्तराखंड : मानसखंड की झांकी ने बनाया इतिहास, उत्तराखंड की झांकी को देश में मिला पहला स्थान

Stay connected via Google News
Follow us for the latest updates.
Add as preferred source on Google

एफएनएन, देहरादून : गणतंत्र दिवस के मौके पर इस बार कर्तव्य पथ पर उत्तराखंड की झांकी बेहद खास रही। मानसखंड थीम पर आधारित उत्तराखंड की झांकी ने देश मे प्रथम स्थान प्राप्त  किया है। झांकी के पहले स्थान पर आने से उत्तराखंड का नाम इतिहास में दर्ज हो गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि हम सबके लिए गौरवशाली पल है। पुराणों में गढ़वाल का केदारखंड और कुमाऊं का मानसखंड के रूप में वर्णन किया गया है। स्कंदपुराण में मानसखंड के बारे में बताया गया है। जागेश्वर मंदिर की बहुत धार्मिक मान्यता है।

पीएम मोदी ने हमेशा अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की बात कही है। मानसखंड मंदिर माला मिशन योजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत चार धाम की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है।

  • सीएम धामी ने दिया था मानसखंड झांकी का सुझाव

बता दें कि भारत सरकार को भेजे गए झांकी का विषय मानसखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुझाया था। उन्होंने मंदिर माला मिशन के अंतर्गत मानसखंड के रूप में इस विषय का सुझाव दिया था। गढ़वाल की चारधाम यात्रा की भांति सरकार कुमाऊं में मंदिर माला मिशन के अंतर्गत पर्यटन बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसी के दृष्टिगत प्रसिद्ध पौराणिक जागेश्वर धाम को झांकी को दिखाया गया था।

  • झांकी में ये था खास

उत्तराखंड का प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क, बारहसिंगा, उत्तराखंड का राज्य पशु कस्तूरी मृग, गोरल, देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर जो उधमसिंह नगर में पाया जाता है, उत्तराखंड के प्रसिद्ध पक्षी घुघुती, तीतर, चकोर, मोनाल आदि व उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपण कला को प्रदर्शित किया गया था। झांकी के आगे और पीछे उत्तराखंड का नाम भी ऐपण कला से लिखा गया था। जागेश्वर धाम का मंदिर घनघोर देवदार के वृक्षों के बीच में है। इसलिए झांकी में मंदिर के आगे और पीछे घनघोर देवदार के वृक्षो का सीन तैयार किया गया था।

  • ऐपण क्या हैं

ऐपण कुमाऊं की समृद्ध और गरिमापूर्ण परंपरा है। इसे गेरू (लाल मिट्टी जो पानी के घोल से तैयार किया जाता है) पर बिस्वार (चावल के आटे का घोल) से अलग-अलग बेलें और चौकियां बनाई जाती हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, नामकरण संस्कार, विवाह, जनेऊ आदि जैसे समारोहों की शुरुआत ऐपण बनाने से की जाती है। यह माना जाता है कि ऐपण सकारात्मकता और समृद्धि लाता है।

  • थीम सांग से बढ़ा उत्साह

झांकी का थीम सांग ‘जय हो कुमाऊं, जय हो गढ़वाला’ को पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध जनकवि जनार्दन उप्रेती ने लिखा था। उसको सौरभ मैठाणी और साथियों ने सुर दिया था। इस थीम गीत के निर्माता पहाड़ी दगड़िया निवासी देहरादून थे।

Stay connected via Google News
Follow us for the latest updates.
Add as preferred source on Google

Hot this week

Chardham Yatra Cyber ठगी का बड़ा खुलासा, 200 फर्जी वेबसाइट बंद

एफएनएन, देहरादून : Chardham Yatra Cyber चारधाम यात्रा के...

Haridwar Bomb Threat की धमकी से हड़कंप, 12 घंटे में आरोपी गिरफ्तार

एफएनएन, हरिद्वार : Haridwar Bomb Threat हरिद्वार में उस...

Uttarkashi Pirul के चकोन स्थित पिरूल प्लांट में भीषण आग, लाखों का नुकसान

एफएनएन, उत्तरकाशी : Uttarkashi Pirul त्तरकाशी जिले के ग्राम...

Topics

Chardham Yatra Cyber ठगी का बड़ा खुलासा, 200 फर्जी वेबसाइट बंद

एफएनएन, देहरादून : Chardham Yatra Cyber चारधाम यात्रा के...

Haridwar Bomb Threat की धमकी से हड़कंप, 12 घंटे में आरोपी गिरफ्तार

एफएनएन, हरिद्वार : Haridwar Bomb Threat हरिद्वार में उस...

Uttarkashi Pirul के चकोन स्थित पिरूल प्लांट में भीषण आग, लाखों का नुकसान

एफएनएन, उत्तरकाशी : Uttarkashi Pirul त्तरकाशी जिले के ग्राम...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img