एफएनएन , नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपनी असली पहचान छिपाकर लंबे समय से राजधानी दिल्ली में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह दक्षिण दिल्ली के एक होटल में मरीज का अटेंडेंट बनकर ठहरा हुआ था और गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहा था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मणिपुर निवासी आरके रीगन सिंह उर्फ ‘गांधी’ (करीब 35 वर्ष) के रूप में हुई है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-1 (WR-1) टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में डीसीपी क्राइम हर्ष इंदौरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी मणिपुर के प्रतिबंधित संगठन के लिए ग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करता था और कथित तौर पर वसूली के नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ था।
फर्जी पहचान बनाकर दिल्ली में छिपा था PLA का सदस्य
डीसीपी हर्ष इंदौरा ने बताया कि क्राइम ब्रांच की WR-1 टीम को सूचना मिली थी कि मणिपुर के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का एक सक्रिय सदस्य दिल्ली में छिपा हुआ है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी शुरू की। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी इनपुट के जरिए आरोपी की मौजूदगी दक्षिण दिल्ली के यूसुफ सराय, सफदरजंग और एम्स के आसपास ट्रैक की गई।
इसके बाद पुलिस टीम ने इलाके में तलाश अभियान चलाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि वह एक अस्पताल में भर्ती मरीज का अटेंडेंट बनकर रह रहा था। वह जिस होटल में ठहरा हुआ था, उसके बाहर कोई नाम या पहचान दर्ज नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए फर्जी आईडी प्रूफ का इस्तेमाल किया था।
मणिपुर में ठेकेदारी की आड़ में कथित वसूली का नेटवर्क
पुलिस जांच में आरोपी की गतिविधियों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, आरके रीगन सिंह उर्फ गांधी केवल उग्रवादी संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाला सदस्य ही नहीं था, बल्कि मणिपुर में एक स्थापित कारोबारी भी था। वह वहां सड़क निर्माण से जुड़े ठेके लेता था।
आरोप है कि वह बड़े स्तर पर वसूली का नेटवर्क संचालित करता था। इस अवैध कमाई को अलग-अलग माध्यमों से वैध धन के रूप में दिखाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस का दावा है कि आरोपी इस धन को मणिपुर में स्थानीय फिल्मों के निर्माण में भी निवेश करता था। वह फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर पैसा लगाकर कथित तौर पर अवैध धन को घुमाता था और इसके जरिए पीएलए संगठन को आर्थिक मदद पहुंचाता था।
परिवार का भी PLA संगठन से पुराना संबंध
डीसीपी हर्ष इंदौरा के मुताबिक, जांच में आरोपी के परिवार का प्रतिबंधित संगठन से पुराना संबंध होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, 1970 के दशक में जब इस संगठन की स्थापना हुई थी, तब आरोपी के सगे चाचा इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। इसी वजह से रीगन सिंह का बचपन से ही संगठन से संपर्क बताया जा रहा है।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपी संगठन के एक वरिष्ठ उग्रवादी सदस्य ‘कर्नल काका’ के सीधे संपर्क में था। वह संगठन की गतिविधियों के लिए जमीनी स्तर पर काम करता था और आर्थिक मदद जुटाने में भी उसकी भूमिका होने का संदेह है।
यूएपीए के तहत दर्ज हैं दो गंभीर मामले
दिल्ली पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ मणिपुर के थौबाल पुलिस स्टेशन में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत दो गंभीर मामले दर्ज हैं। ये मामले हिंसा और कथित वसूली से संबंधित बताए जा रहे हैं।
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मणिपुर पुलिस को सौंप दिया है। अब मणिपुर पुलिस उससे पूछताछ कर संगठन से जुड़े अन्य लोगों, कथित वसूली नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन के संबंध में जानकारी जुटाएगी। पुलिस जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आरोपी दिल्ली में किस उद्देश्य से छिपा हुआ था और राजधानी में उसके संपर्क किन लोगों से थे।








