एफएनएन , देहरादून : उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए शासन ने निर्वाचन कार्यों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। भारत निर्वाचन आयोग की तबादला नीति के तहत अब चुनाव प्रक्रिया में सीधे तौर पर जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं रखा जाएगा।
इसके अलावा ऐसे अधिकारियों का भी तबादला किया जाएगा, जिन्होंने पिछले चार वर्षों के दौरान किसी एक जिले में तीन साल या उससे अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस आदेश के बाद प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस विभाग के स्तर पर बड़े फेरबदल की संभावना बढ़ गई है।
गृह जिले में तैनात नहीं रह सकेंगे चुनाव से जुड़े अधिकारी
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों से बचने के लिए चुनाव कार्यों में सीधे शामिल अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया जाएगा।
नियम के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को उसके गृह जनपद में चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। वहीं, पिछले चार साल में एक ही जिले में तीन साल या उससे अधिक समय तक तैनात रहे अधिकारियों को भी स्थानांतरित करना होगा।
हालांकि, यह व्यवस्था प्रदेश के सभी विभागों और कर्मचारियों पर समान रूप से लागू नहीं होगी। इसका दायरा मुख्य रूप से उन अधिकारियों तक सीमित रहेगा, जिनकी भूमिका चुनाव संपन्न कराने में प्रत्यक्ष रूप से होती है।
डीएम से लेकर इंस्पेक्टर तक आएंगे तबादला नीति के दायरे में
निर्वाचन आयोग की तबादला नीति के तहत जिला प्रशासन, पुलिस और कुछ अन्य विभागों के अधिकारी शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- जिला प्रशासन: जिलाधिकारी (डीएम), अपर जिलाधिकारी (एडीएम), उप जिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार।
- पुलिस विभाग: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), पुलिस अधीक्षक (एसपी), क्षेत्राधिकारी (सीओ), इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर।
- परिवहन विभाग: क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) और सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ)।
- नगर निगम और विकास प्राधिकरण: प्रतिनियुक्ति पर तैनात वे अधिकारी, जिनकी चुनाव प्रक्रिया में सीधी भूमिका है।
- आबकारी विभाग: उपनिरीक्षक और उनसे ऊपर के स्तर के अधिकारी।
इन अधिकारियों की तैनाती और कार्यकाल की समीक्षा के बाद आयोग के निर्देशों के अनुसार तबादले किए जाएंगे।
आपराधिक मामलों और अनुशासनिक कार्रवाई वाले अधिकारी नहीं करेंगे चुनाव ड्यूटी
निर्वाचन आयोग ने चुनाव ड्यूटी में अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। जिन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में आपराधिक मामले लंबित हैं या जिनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है, उन्हें चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों से दूर रखा जाएगा।
इसके साथ ही चिकित्सा, शिक्षा, इंजीनियरिंग और राज्य मुख्यालयों में तैनात ऐसे कर्मचारियों को इस तबादला नीति से छूट दी गई है, जिनका चुनाव प्रक्रिया से सीधा संबंध नहीं है।
25 नवंबर 2026 तक आयोग को देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को तबादला संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 25 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस समयसीमा को देखते हुए शासन स्तर पर अधिकारियों की तैनाती और कार्यकाल से जुड़ी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले होने वाली इस कवायद के चलते प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है। आने वाले समय में प्रदेश के कई जिलों में अधिकारियों के तबादले देखने को मिल सकते हैं।








