एफएनएन , देहरादून/ऋषिकेश : उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का मुख्य सीजन अब समाप्ति की ओर है। इसके साथ ही राज्य में शीतकालीन यात्रा और सर्दियों के पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्गों की स्थिति यात्रियों के लिए अहम हो गई है। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में हुए नुकसान के बाद सड़कों की कितनी मरम्मत हुई है और ऑल वेदर रोड परियोजना का असर कितना दिखाई दे रहा है, इन सवालों को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट में सड़क मार्ग का जायजा लिया गया।
ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर और रुद्रप्रयाग होते हुए आगे बढ़ने पर अधिकांश हिस्सों में यातायात सामान्य दिखाई दिया। हालांकि, श्रीनगर से आगे फरासू के पास पहाड़ी को सुरक्षित बनाने और सड़क सुधार का काम जारी मिला। यहां निर्माण कार्य के चलते वाहनों को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा था। इस दौरान स्थानीय कारोबारियों से बातचीत में यह भी सामने आया कि चारधाम यात्रा का मुख्य सीजन समाप्त होने के बाद भी शीतकालीन पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों से कारोबारियों को उम्मीदें हैं।
ऋषिकेश से शुरू होता है चारधाम का पहाड़ी सफर
ऋषिकेश को बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां से अलग-अलग मार्ग पहाड़ी जिलों और चारों धामों की ओर जाते हैं। यात्रा के मुख्य सीजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस क्षेत्र से गुजरते हैं। मानसून के बाद अब सर्दियों की यात्रा और पर्यटन गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है।
ऋषिकेश में स्थानीय कारोबारियों से बातचीत के दौरान सामने आया कि सर्दियों में पर्यटकों की संख्या में बदलाव का असर छोटे व्यवसायों पर भी पड़ता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में शीतकालीन यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से मुख्य यात्रा सीजन के बाद भी लोगों को काम मिलने की उम्मीद बनी रहती है।
गन्ने का रस और मूंगफली का ठेला लगाकर परिवार चलाने वाले प्रेम सिंह यादव ने बताया कि नवंबर से फरवरी के बीच कारोबार कुछ धीमा हो जाता है। उनके मुताबिक, पिछले 8 से 10 वर्षों में ऑफ-सीजन का स्वरूप बदला है और मुख्य यात्रा सीजन के बाद भी श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की आवाजाही छोटे कारोबारियों को सहारा देती है।
ऋषिकेश से देवप्रयाग तक सड़क पर सामान्य रहा यातायात
ऋषिकेश से आगे नरेंद्रनगर की ओर जाने वाला मार्ग उत्तरकाशी, गंगोत्री और यमुनोत्री की दिशा में जाता है। वहीं, देवप्रयाग और श्रीनगर होते हुए आगे बढ़ने वाला मार्ग अलकनंदा और मंदाकिनी घाटियों को जोड़ता है। इसी क्षेत्र से केदारनाथ और बदरीनाथ जाने वाले यात्रियों की आवाजाही भी होती है।
सड़क मार्ग का जायजा लेने के दौरान ऋषिकेश से देवप्रयाग तक सफर सामान्य रहा। इस हिस्से में यातायात सुचारू दिखाई दिया और बड़े गड्ढों या भारी भूस्खलन से रास्ता बाधित होने जैसी स्थिति नजर नहीं आई।
हालांकि, पहाड़ी मार्गों पर मौसम में बदलाव के साथ परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। ऐसे में शीतकालीन यात्रा शुरू होने से पहले सड़कों की नियमित निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना जरूरी होगा।
देवप्रयाग संगम पर श्रद्धालु, कारोबारियों को सर्दियों से उम्मीद
ऋषिकेश से आगे देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है। दोनों नदियों के मिलने के बाद गंगा आगे बढ़ती है। अक्टूबर के अंतिम दिनों में भी संगम क्षेत्र में श्रद्धालु और पर्यटक दिखाई दिए।
यहां स्थानीय लोगों से बातचीत में यात्रा सीजन और ऑफ-सीजन के बीच कारोबार में आने वाले बदलावों की जानकारी मिली। स्थानीय युवा आदित्य सिंह के अनुसार, मुख्य यात्रा सीजन के दौरान धामों के आसपास कारोबार करने वाले लोगों को अच्छा काम मिलता है। कपाट बंद होने के समय कई कारोबारी निचले इलाकों में लौट आते हैं, जबकि सर्दियों में स्थानीय आवाजाही और पर्यटन से कुछ काम बना रहता है।
देवप्रयाग संगम के पास कारोबार करने वाले विनोद सिंह ने बताया कि सर्दियों में औली और चोपता जैसे पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी देखने के लिए पर्यटक पहुंचते हैं। वहीं, ऊखीमठ और जोशीमठ जैसे स्थानों पर शीतकालीन पूजा और धार्मिक गतिविधियों के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि शीतकालीन पर्यटन का असर हर बाजार पर एक जैसा नहीं होता। पर्यटकों की संख्या, सड़क की स्थिति और स्थानीय सुविधाओं के आधार पर कारोबार में अंतर देखने को मिलता है।
फरासू में सड़क सुधार और पहाड़ी को सुरक्षित बनाने का काम जारी
देवप्रयाग से श्रीनगर गढ़वाल की ओर बढ़ने पर अधिकांश हिस्सों में यातायात सामान्य मिला। लेकिन श्रीनगर से आगे धारी देवी मंदिर के बाद फरासू के पास सड़क सुधार और पहाड़ी को स्थिर करने का काम जारी दिखाई दिया।
मानसून के दौरान हुए भूस्खलन के बाद इस क्षेत्र में ढलान को सुरक्षित बनाने यानी स्लोप स्टेबलाइजेशन का काम किया जा रहा है। मौके पर ढीले पत्थरों और मलबे को हटाने के साथ सड़क को सुरक्षित बनाने से जुड़े कार्य दिखाई दिए।
निर्माण कार्य के कारण वाहनों को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा था। इससे यात्रियों को कुछ समय के लिए रुकना पड़ रहा था। इस हिस्से में सड़क सुधार का काम जारी होने से स्पष्ट है कि संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में रखरखाव और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।
ऑल वेदर रोड परियोजना का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाना और यात्रा को सुगम करना है। हालांकि, फरासू जैसे भूस्खलन प्रभावित स्थानों पर सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और मरम्मत की जरूरत बनी रहती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस स्थान पर काम पूरा होने की आधिकारिक समयसीमा की पुष्टि नहीं हुई है।
रुद्रप्रयाग में बाजार की चहल-पहल, शीतकालीन पर्यटन पर टिकी उम्मीदें
फरासू से आगे रुद्रप्रयाग पहुंचने पर मुख्य बाजार में सामान्य चहल-पहल दिखाई दी। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह शहर चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्गों में शामिल है। यहां होटल, ढाबे, परिवहन व्यवसाय और अन्य स्थानीय कारोबार यात्रा से जुड़े रहते हैं।
व्यापारी राजेश नौटियाल ने बताया कि मुख्य यात्रा सीजन समाप्त होने के बाद भी चोपता, तुंगनाथ, देवरियाताल और कार्तिक स्वामी जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा के दौरान भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
उनके मुताबिक, शीतकालीन यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय होटल, लॉज और बाजार को लाभ मिलने की उम्मीद रहती है।
वहीं, व्यापारी सुरेंद्र सिंह कपरवान ने बताया कि चारधाम यात्रा का सीधा लाभ मुख्य राजमार्गों पर स्थित होटल, ढाबे और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिलता है। दूसरी ओर, शहर के अंदरूनी बाजार की आमदनी स्थानीय निवासियों, शादियों के सीजन और रोजमर्रा की खरीदारी पर भी निर्भर करती है।
शीतकालीन यात्रा से पहले सड़क सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी
ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर और रुद्रप्रयाग तक सड़क मार्ग के जायजे में दो प्रमुख बातें सामने आईं। पहली, अधिकांश हिस्सों में यातायात सामान्य दिखाई दिया। दूसरी, फरासू जैसे संवेदनशील स्थानों पर सड़क सुधार और पहाड़ी को स्थिर करने का काम अभी जारी है।
सर्दियों में तापमान गिरने, बारिश या बर्फबारी और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों के कारण पहाड़ी सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। ऐसे में शीतकालीन यात्रा से पहले संवेदनशील स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा करना, यातायात प्रबंधन बेहतर बनाना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
पर्यटन बढ़ाने के साथ स्थानीय रोजगार पर भी नजर
देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग के कारोबारियों की बातचीत से पता चलता है कि मुख्य चारधाम यात्रा सीजन के बाद भी स्थानीय स्तर पर पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों से रोजगार की उम्मीद बनी रहती है। हालांकि, इन उम्मीदों को स्थायी आमदनी में बदलने के लिए सड़क संपर्क के साथ पर्यटक सुविधाओं, स्थानीय पर्यटन स्थलों के प्रचार और बाजारों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना भी जरूरी है।
उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच सड़क मार्गों की मौजूदा स्थिति अहम भूमिका निभाएगी। ऑल वेदर रोड परियोजना और सड़क सुधार के कार्यों का वास्तविक लाभ तभी अधिक प्रभावी होगा, जब यात्रियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन के साथ स्थानीय कारोबारियों को भी सालभर रोजगार के अवसर मिल सकें।








