एफएनएन , पिथौरागढ़ : उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खलिया टॉप में निर्धारित अनुमति से अधिक टेंट लगाकर पर्यटकों को ठहराने का मामला सामने आया है। वन विभाग के औचक निरीक्षण के दौरान यहां 12 की अनुमति के मुकाबले 30 टेंट लगे मिले। विभाग ने नियमों के उल्लंघन के मामले में संबंधित टूर ऑपरेटरों के चालान किए हैं। साथ ही उन पर जुर्माना तय करने की प्रक्रिया की जा रही है।
खलिया टॉप अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे बुग्यालों, हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं और ट्रैकिंग मार्गों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। हालांकि, पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी हो गया है।
12 टेंट की अनुमति, मौके पर मिले 30
खलिया टॉप में पर्यटकों के ठहरने के लिए टेंट लगाने की अनुमति निर्धारित है। वन विभाग के निरीक्षण में यहां कुल 30 टेंट लगे पाए गए, जबकि केवल 12 टेंट लगाने की अनुमति थी। इस तरह निर्धारित सीमा से 18 अधिक टेंट लगाए गए थे।
वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित टूर ऑपरेटरों के चालान किए हैं। विभाग के अनुसार, नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माने की राशि तय की जाएगी।
एसडीओ नेहा सौन ने बताया कि खलिया बुग्याल में 30 टेंट मिले हैं, जबकि अनुमति केवल 12 की थी। बिना अनुमति लगाए गए 18 टेंट के संबंध में संबंधित संचालकों के चालान किए गए हैं।
पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है खलिया बुग्याल
खलिया टॉप का बुग्याल क्षेत्र प्राकृतिक और पारिस्थितिकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अनियंत्रित पर्यटन से वनस्पतियों, वन्यजीवों के आवास और प्राकृतिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्लास्टिक कचरा, खुले में अपशिष्ट छोड़ना और बिना नियोजन के पर्यटन गतिविधियां संचालित करना पर्यावरण के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए यहां टेंट लगाने, पर्यटकों के ठहरने और कचरा निस्तारण से संबंधित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार के बीच संतुलन जरूरी
खलिया टॉप मुनस्यारी की पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाले पर्यटकों से स्थानीय कारोबारियों, गाइडों और अन्य लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इसके लिए पर्यावरणीय मानकों का पालन भी जरूरी है।
वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब संबंधित टूर ऑपरेटरों पर जुर्माना तय किए जाने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। नियमों के अनुरूप पर्यटन गतिविधियां संचालित होने से स्थानीय रोजगार के अवसरों और क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर, दोनों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।








