एफएनएन, देहरादून : Haridwar उत्तराखंड की धामी सरकार ने हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। विजिलेंस जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी IAS वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को मेजर पनिशमेंट देने और पीसीएस अधिकारी अजय वीर की तीन वेतन वृद्धियां रोकने का निर्णय लिया गया है।
करीब 54 करोड़ रुपये की भूमि खरीद से जुड़े इस मामले में विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की अनुमति भी मिल गई है। जांच में प्रथम दृष्टया नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप सही पाए गए हैं। इसके आधार पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
विजिलेंस अब IAS वरुण चौधरी समेत तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रा, लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश कांडपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करेगी। इसके अलावा भूमि विक्रेताओं सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह को भी आरोपी बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विजिलेंस अब मामले में मनी ट्रेल की जांच कर घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी तलाशेगी।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में हरिद्वार नगर निगम ने 33 बीघा जमीन करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। बाद में जांच में भूमि के मूल्यांकन और खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद सरकार ने पहले निलंबन और अब कठोर प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।






