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पं. राधेश्याम कथावाचक का साहित्य आज भी प्रासंगिक और भविष्य में भी रहेगा

विशिष्ट अतिथि साहित्यकार रमेश गौतम ने कहा कि राधेश्याम कथावाचक का संपूर्ण सृजन महत्वपूर्ण है। राधेश्याम रामायण में अभिव्यक्त उनकी नारी संवेदना बहुआयामी है।