एस एंड सी कर्मचारी यूनियन की रबड़ फैक्टरी कर्मचारियों की एक मीटिंग रामपुर गार्डन में शैलेन्द्र चौवे की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के उस हालिया बयान की तीखी आलोचना की गई जिसमें 25 वर्ष से बंद पड़ी रबड़ फैक्ट्री के बदले बरेली को विकास के नाम पर तीन बड़े उद्योग देने की घोषणा की गई है।
एस & सी कर्मचारी यूनियन के महामंत्री/श्रमिक नेता अशोक कुमार मिश्रा ने बैठक में भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे सभी विस्थापित रबड़ फैक्ट्री कर्मियों को बताया कि उच्च न्यायालय मुम्बई के ऑफिशियल लिकयूडेटर (ओएल) द्वारा 330 ऐसे रबड़ फैक्ट्री श्रमिकों की लिस्ट भेजी है जिन्होंने बार-बार मांगने पर भी अभी तक अपने आधार कार्ड, जन्म तिथि, ग्रेड के सबूत और भर्ती होने तथा संभावित रिटायरमेन्ट की तिथि के अभिलेख/साक्ष्य जमा नहीं कराए हैं।
बैठक में समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि ऐतिहासिक बरेली कॉलेज में बीस-बीस साल से भी ज्यादा लगातार नौकरी करने के बावजूद सैकड़ों अस्थायी कर्मचारियों को न तो श्रम विभाग से तय न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है और न ही किसी के स्थायित्व की प्रक्रिया शुरू की गई है। हमारी कोशिश संगठन के बैनर तले समय-समय पर धरना-प्रदर्शन करने की होगी। कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन से वार्ता कर अस्थायी कर्मचारियों को श्रम विभाग से निर्धारित न्यूनतम मासिक वेतन, शासन द्वारा निर्धारित सभी भत्ते दिलवाने के साथ ही उनका नियमितीकरण कराने की पहल भी जारी रखी जाएगी।
एफएनएन ब्यूरो, बरेली। शहर में मेट्रो रेल संचालन की संभावनाओं पर बीडीए और राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस) के अधिकारियों ने मंगलवार को घंटों विचार मंथन किया। मेट्रो के प्रस्तावित दोनों कॉरिडोर्स पर वर्ष 2056 तक रोजाना सात लाख यात्रियों की आवाजाही का अनुमान लगाते हुए मेट्रो या लाइट मेट्रो की उपयोगिता के सवाल पर जमतर कवायद हुई। अब 15 अक्तूबर तक सर्वेक्षण कर पता लगाया जाएगा कि शहर में लाइट मेट्रो का आधारभूत ढांचा बनवाया जाए या भविष्य की जरूरत को देखते हुए मेट्रो रेल का स्ट्रक्चर तैयार करवाना ही अधिक समझदारी और दूरदृष्टि वाला उपयुक्त फैसला लिया जाए।