एफएनएन , देहरादून : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। भाजपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों में संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता और सात बार के विधायक बंशीधर भगत के बयान ने कालाढूंगी विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। भगत ने आगामी विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में उतरने के बजाय अपने बेटे विकास भगत को टिकट देने की पैरवी की है।
बंशीधर भगत का कहना है कि उनका बेटा क्षेत्र में सक्रिय है और उसकी लोकप्रियता भी बढ़ी है। उन्होंने यहां तक कहा कि विकास भगत की लोकप्रियता और सक्रियता अब उनसे अधिक हो चुकी है। ऐसे में वह चाहते हैं कि पार्टी आगामी चुनाव में उनके बेटे को कालाढूंगी सीट से उम्मीदवार बनाए। हालांकि, टिकट देने का अंतिम फैसला भाजपा हाईकमान को ही करना है।
सात बार विधायक रह चुके हैं बंशीधर भगत
बंशीधर भगत उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर वर्ष 1975 में जनसंघ से शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने कई चुनाव लड़े और लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
वर्ष 1991 में वह पहली बार नैनीताल विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 1993 और 1996 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। वर्ष 2002 में उन्होंने हल्द्वानी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2007 में उन्होंने हल्द्वानी सीट से जीत हासिल कर दोबारा विधानसभा में जगह बनाई।
इसके बाद बंशीधर भगत ने कालाढूंगी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना शुरू किया। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। इस तरह वह कुल सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और लगातार चुनावी जीत के चलते कालाढूंगी क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान रही है।
मंत्री से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक संभाली अहम जिम्मेदारियां
बंशीधर भगत ने अपने राजनीतिक करियर में संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह उत्तर प्रदेश सरकार के दौर में भी मंत्री रहे और उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भाजपा सरकार में भी उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली।
सरकार में रहते हुए उन्होंने अलग-अलग समय पर विभिन्न विभागों का कामकाज संभाला। इसके अलावा वर्ष 2020 में उन्हें उत्तराखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। इस भूमिका में उन्होंने पार्टी संगठन की जिम्मेदारी निभाई।
लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने, विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने और सरकार व संगठन में अहम पदों पर काम करने के कारण बंशीधर भगत को प्रदेश भाजपा के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में उनका खुद चुनाव नहीं लड़ने और बेटे के लिए टिकट की पैरवी करने का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कालाढूंगी सीट से बेटे विकास भगत को आगे बढ़ाना चाहते हैं
बंशीधर भगत जिस नेता की लोकप्रियता और सक्रियता को अपनी तुलना में अधिक बता रहे हैं, वह उनके बेटे विकास भगत हैं। विकास भगत भी भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं और पार्टी में प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
अब बंशीधर भगत चाहते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में कालाढूंगी सीट से विकास भगत को मौका दिया जाए। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वह अपनी राजनीतिक विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने के पक्ष में हैं।
कालाढूंगी सीट पर बंशीधर भगत की लंबे समय से मजबूत पकड़ रही है। उन्होंने इस क्षेत्र से लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है। ऐसे में इस सीट पर उनके बेटे की दावेदारी को लेकर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि, विकास भगत को टिकट मिलेगा या नहीं, यह पार्टी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
बंशीधर भगत बोले- विकास मुझसे ज्यादा वोटों से जीतेगा
अपने बेटे की दावेदारी को लेकर बंशीधर भगत ने कहा कि विकास भगत क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं और उनकी लोकप्रियता भी बढ़ी है। उन्होंने पिछली बार भी बेटे के लिए टिकट की पैरवी करने की बात कही।
भगत के मुताबिक, पिछली बार उन्होंने विकास भगत को टिकट देने का आग्रह किया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें ही उम्मीदवार बनाया। इस बार वह चाहते हैं कि पार्टी उनके बेटे को चुनाव लड़ने का अवसर दे।
उन्होंने विश्वास जताया कि विकास भगत को टिकट मिलने पर वह उनसे अधिक वोटों के अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंच सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उम्मीदवार तय करने का अधिकार भाजपा हाईकमान के पास है।
भाजपा हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
बंशीधर भगत के बयान के बाद कालाढूंगी विधानसभा सीट पर भाजपा के संभावित प्रत्याशी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर भगत का लंबा राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनका प्रभाव है, तो दूसरी ओर वह अपने बेटे को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है, यह पार्टी की चुनावी रणनीति, संगठनात्मक आकलन और केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल बंशीधर भगत की ओर से विकास भगत के समर्थन में की गई पैरवी ने कालाढूंगी सीट को लेकर राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है।
अब सबकी निगाहें भाजपा हाईकमान पर हैं कि वह कालाढूंगी सीट से बंशीधर भगत को फिर मौका देता है या उनके बेटे विकास भगत को चुनावी मैदान में उतारता है।








