एफएनएन, उत्तरकाशी : Dharali उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में पिछले वर्ष अगस्त में आई विनाशकारी आपदा के करीब एक साल दो महीने बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को खोजने की मुहिम शुरू कर दी है। नवरात्रि के पहले दिन गांव के आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए खुदाई का काम शुरू किया गया।
ग्रामीणों के लिए कल्प केदार मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। पिछले साल आई आपदा के दौरान भारी मात्रा में मलबा जमा होने से मंदिर दब गया था। ग्रामीणों का अनुमान है कि मंदिर करीब 25 फीट नीचे मलबे में दबा हो सकता है।
पूजा-अर्चना और हवन के बाद शुरू हुआ काम
मंदिर की खोज शुरू करने से पहले निर्धारित स्थल पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान हवन भी किया गया। ग्रामीणों ने समेश्वर देवता की देवडोली के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद देवता की ओर से निर्धारित समय पर मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया।
फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की मदद से खुदाई कर रहे हैं। कल्प केदार मंदिर समिति के अनुसार, मंदिर के अवशेष मिलने और उसे मलबे से बाहर निकालने के बाद जीर्णोद्धार की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने भी की है मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार के मुताबिक, समेश्वर देवता के आदेश के बाद ग्रामीणों ने खुदाई का कार्य शुरू किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की गई है।
राजेश पंवार ने कहा कि मंदिर की खोज और पुनर्निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा करने के लिए जल्द ही समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासनिक सहयोग मिलने से मंदिर को दोबारा सामने लाने और उसके संरक्षण का काम आगे बढ़ सकेगा।
1803 से अब तक कई आपदाओं से जुड़ा रहा है मंदिर का इतिहास
मंदिर समिति के सदस्य संजय पंवार के अनुसार, बुजुर्गों से मिली जानकारी में कल्प केदार मंदिर का इतिहास कई प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ा बताया जाता है। उनके मुताबिक, वर्ष 1803 में आई आपदा के दौरान बाढ़ में मंदिर बह गया था। उस समय इस क्षेत्र में करीब 204 मंदिरों का समूह होने की बात कही जाती है।
इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई देने का उल्लेख मिलता है। फिर वर्ष 1926 में आई एक अन्य आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर का एक हिस्सा जमीन में दब गया था, जबकि आसपास के छोटे मंदिर बह गए थे।
वर्ष 1926 में भी ग्रामीणों ने की थी खुदाई
संजय पंवार ने बताया कि वर्ष 1926 की आपदा के बाद ग्रामीणों ने खुदाई करके मुख्य कल्प केदार मंदिर को बाहर निकाला था। अब करीब एक सदी बाद पिछले वर्ष अगस्त में आई धराली की आपदा के कारण मंदिर फिर से मलबे में दब गया।
ग्रामीणों का अनुमान है कि इस बार मंदिर लगभग 25 फीट नीचे दबा हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए नवरात्रि के पहले दिन से मंदिर की तलाश शुरू की गई है। हालांकि, मंदिर की वास्तविक स्थिति और उसके अवशेषों के बारे में खुदाई आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
धार्मिक आस्था के साथ विरासत बचाने की भी कोशिश
धराली में कल्प केदार मंदिर की खोज के लिए शुरू किया गया यह अभियान ग्रामीणों के लिए धार्मिक आस्था के साथ अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का प्रयास भी है। आपदा के बाद गांव में पुनर्वास और जनजीवन को सामान्य बनाने की चुनौतियों के बीच ग्रामीणों ने प्राचीन मंदिर को दोबारा सामने लाने का संकल्प लिया है।
अब सबकी निगाहें खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष मिलने और उसके बाद शुरू होने वाली जीर्णोद्धार प्रक्रिया पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों और प्रशासनिक सहयोग से कल्प केदार मंदिर को फिर से उसका पुराना स्वरूप दिलाने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।







