एफएनएन , नैनीताल : नैनीताल जिले के ज्योलिकोट और आसपास के गांवों गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक और उत्तराखंड पेयजल निगम के कुमाऊं मंडल के मुख्य अभियंता व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की।
पूरे प्रदेश के लिए नई SOP बनाने के निर्देश
राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जल जनित रोगों की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि नई SOP को पूरे उत्तराखंड में सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में दूषित पेयजल के कारण लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पानी के टैंकों की सफाई को लेकर सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले में विभागीय लापरवाही को लेकर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अशुद्ध पानी पीने से जो लोग बीमार हुए, उसके लिए जल संस्थान और अन्य संबंधित विभागों की लापरवाही जिम्मेदार रही।
कोर्ट ने कहा कि यदि समय-समय पर और हर मौसम में पानी के टैंकों की नियमित सफाई की जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
अधिकारियों को अगली पेशी से मिली छूट
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है। अब मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक नई SOP तैयार कर अदालत के समक्ष पेश की जाए और उसे पूरे प्रदेश में लागू करने की कार्रवाई की जाए।
तीन महीने से सामने आ रहे थे बीमारी के मामले
ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पानी से जल जनित बीमारियों के मामले लगातार सामने आए थे। जानकारी के मुताबिक, करीब तीन महीने से क्षेत्र में डायरिया और संक्रमण के मरीज मिल रहे थे।
इस दौरान एक छात्र और एक महिला की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया था। पूरे क्षेत्र में 250 से अधिक लोगों के पीलिया, टायफाइड और डायरिया की चपेट में आने की बात सामने आई थी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब सरकार और संबंधित विभागों को जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नई SOP तैयार कर उसे पूरे प्रदेश में लागू करना होगा।








